मोदी मंत्रिमंडल में इनकी हो सकती है सरप्राइज एंट्री

राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल विस्तार व फेरबदल में एक सरप्राइज एंट्री भी देखने को मिल सकता है.

अभी तक कयास लगाया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के अलावा ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम, जनता दल यूनाइटेड और शिवसेना के सांसद इस विस्तार में शामिल किए जा सकते हैं. सूत्रों के अनुसार इस राजग परिवार में एक और पार्टी की भी एंट्री होगी और उसके सांसद को भी मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी.

यह दल है राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी की शरद पवार की एनसीपी. संसद में एनसीपी के अभी 11 सांसद हैं. लोकसभा में सदस्यों की संख्या 6 और राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 5 है. इस संख्या बल पर दो मंत्री पद मिल सकता है. ऐसे में लोकसभा से सुप्रिया सुले और राज्यसभा से प्रफुल्ल पटेल के नाम की लॉटरी खुल सकती है.









राजनीतिक गलियारे में लेकिन इसे लेकर विस्मय का माहौल है. विश्लेषकों के यह गले नहीं उतर रहा है कि जिस शरद पवार, अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल आदि नेताओं के भ्रष्टाचार को बीजेपी ने महाराष्ट्र में मुद्दा बनाया उसे आगे साझीदार का रोल मिलेगा. दरअसल, एनसीपी के नेताओं को सरकारी एजेंसियों ने ऐसा बुरी तरह जकड़ लिया है कि शरद पवार व प्रफुल्ल पटेल एंड पार्टी लगभग मोदी सरकार के ऑक्सीजन पर है.

प्रफुल्ल पटेल अजित पवार छगन भुजबल आदि नेताओं के ऐसे ऐसे मामले खुले हुए हैं कि इनके पास मोदी सरकार के पास सरेंडर के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है.









पिछले छह महीने में प्रफुल्ल पटेल केंद्रित ऐसी जांच शुरू हुई है कि जिसे यदि अंतिम परिणति में मोदी सरकार पहुंचा दे तो विशेषकर महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ जाये.

बीजेपी अपने साथ एनसीपी को सिर्फ इसलिए जोड़ना चाहती है ताकि शिवसेना और कांग्रेस दोनों को हाशिये पर धकेल सके. एनसीपी के राजग में शामिल होने से बीजेपी को महाराष्ट्र के 2019 विधानसभा चुनाव में शिवसेना को औकात दिखाने का विकल्प होगा. एनसीपी के राजग में शामिल होने की स्थिति में बीजेपी को एनसीपी को उतनी सीट नहीं देनी पड़ेगी जितना शिवसेना को देना पड़ता है.









ऐसी स्थिति में शिवसेना और कांग्रेस दोनों अलग थलग होने के बाद त्रिकोणीय चुनाव होगा. ऐसी स्थिति में बीजेपी अपनी आंधी को दोहरा देगी और महाराष्ट्र का सियासी भूगोल बदल जायेगा.

बीजेपी व एनसीपी की नजदीकियां गुजरात के राज्यसभा चुनाव में देखने को मिल चुका है. प्रफुल्ल पटेल ने यह साबित करने की भरपूर कोशिश की कि वह अहमद पटेल के साथ नहीं हैं.







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