नौकरी छोड़ गांव के बच्चों को मॉडर्न बना रहा है ये 24 साल का मैकेनिकल इंजीनियर

प्रेरणादायक

जहां एक ओर युवाओं का बड़ा हिस्सा नशे और सोशल मीडिया की गिरफ्त में फंस रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ युवा अपना समय और एनर्जी देश की भलाई में लगा रहे हैं। 24 साल के समीर कुमार मिश्रा उन्हीं चुनिंदा लोगों में से हैं। पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर रहे समीर आज उड़ीसा के एक गांव के मसीहा बन चुके हैं।

जमी-जमाई नौकरी छोड़कर गांव के बच्चों के लिए इनोवेशन लैब बनाने और चलाने का उनका फैसला वाकई बेहद प्रेरणादायी है। कहां से शुरू हुई इस इनोवेशन लैब की कहानी और ये बच्चों को किस तरह मदद कर रही है, चलिए जानते हैं।

मणिपाल यूनिवर्सिटी से की पढ़ाई
जयपुर की मणिपाल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाले समीर को यूथ फॉर इंडिया फेलोशिप प्रोग्राम के अंतर्गत नौकरी मिली थी। वे इस फेलोशिप के सबसे यंग कैंडिडेट थे। इसी प्रोग्राम के तहत समीर की पोस्टिंग ओडिशा के ग्राम विकास स्कूल में कर दी गई। ग्राम विकास में आयोजित फुटबॉल लीग के दौरान समीर और वहां के बच्चों के बीच एक गहरा बॉन्ड बन गया। उसी के बाद से वे और बच्चे एक-दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने लगे।

मूवी की वजह से आया आइडिया
समीर वीकेंड्स के दौरान बच्चों के लिए मूवी स्क्रीनिंग अरेंज करने लगे। उनकी बदौलत बच्चों को ‘अक्टूबर स्काई’ और ‘बिग हीरो 6’ जैसी फिल्में देखने को मिली। ‘बिग हीरो 6’ फिल्म में कुछ स्कूल स्टूडेंट प्राइमरी हेल्थ केयर रोबोट बनाते हैं, जिसे देख गांव के बच्चों ने समीर से पूछा, ‘क्या ऐसा कुछ बना पाना हकीकत में भी संभव है या ऐसी चीजें सिर्फ फिल्मों में ही देखने को मिलती हैं?’ बच्चों के इस सवाल से समीर के मन में इनोवेशन लैब बनाने का ख्याल आया। ताकि गांव के बच्चे आस-पास मौजूद सामानों के बूते नई-नई चीजें बनाना सीख सकें।

शुरू की खुद की इनोवेशन लैब
अपनी सोच को सच्चाई में बदलते हुए समीर ने नौकरी छोड़कर गांव में एक इनोवेशन लैब तैयार की। ‘नवोन्मेष प्रयोगशाला’ के नाम से बने इस स्कूल का हिंदी अर्थ है इनोवेशन लैब। यहां बच्चों को कई वार्षिक प्रोजेक्ट्स भी दिए जाते हैं, जिन्हें ‘परिकल्प’ कहा जाता है। इन इनोवेशन्स के माध्यम से बच्चे नई-नई चीजें बनाना सीखते हैं, साथ ही गांव की परेशानियों का हल निकालते हैं।

खुद समीर ही बनाना चाहते हैं इसकी शाखाएं
समीर सभी ग्राम विकास विद्या विहार स्कूलों में इस इनोवेशन लैब की शाखाएं खोलना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने अटल टिंकरिंग लैब कार्यक्रम के तहत नीति आयोग फंड के लिए भी अप्लाई किया है, ताकि वे अपना सपना पूरा कर सकें।

किया गूगल वॉइस इनपुट का इस्तेमाल
समीर के मुताबिक, नई-नई चीजें सीखने के लिए बच्चों को कंप्यूटर और इंटरनेट से जोड़ना जरुरी था। लेकिन इंग्लिश कमजोर होने की वजह से बच्चे इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में समीर ने बच्चों को गूगल वॉइस इनपुट का इस्तेमाल करना सिखाया ताकि वे इंटरनेट का भरपूर लाभ उठा सकें।

स्कूल में लगाई गई अमेज़न विशलिस्ट
बच्चों को अपनी रचनाएं बनाने में कभी किसी चीज की कमी न हो इसलिए स्कूल में एक अमेज़न विशलिस्ट भी बनाई गई। जहां हर जरुरत के सामान का जिक्र कर दिया जाता है। समय और सुविधा के अनुसार उस विशलिस्ट की पूर्ति होती रहती है, ताकि स्टूडेंट्स को किसी तरह की दिक्कत न हो।

कई चीजें बना चुके हैं यहां के बच्चे
अब तक समीर और इनोवेशन लैब के बच्चे मिलकर एनीमोमीटर मॉडल (हवा की गति मापने के लिए एक उपकरण), छत के पंखों को चलाने के लिए मोटर की जगह न्यूटन डिस्क जैसे कई लाजवाब इनोवेशन्स कर चुके हैं। इसके अलावा वे कई अलग-अलग तरह के डाइजेस्टिव और बायोलॉजिकल मॉडल भी तैयार कर चुके हैं।

वाकई समीर की ये पहल सिर्फ ग्रामीण बच्चों की ही नहीं बल्कि देश की भी तरक्की में बड़ा योगदान साबित होगी। भविष्य में ये इनोवेशन लैब कई महान क्रिएशन्स का कारण बन सकती है।

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