mitti ka chulha and chhath puja

छठ स्पेशल | छठ का प्रसाद और मिट्टी के चूल्हे का महत्व

संस्कृति और परंपरा

छठ पूजा प्रति वर्ष मुख्यता बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड और नेपाल समेत भारत के कई हिस्सों में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह एक बहुत ही प्राचीन त्यौहार है जिसको डाला छठ, डाला पुजा, सूर्य षष्ठी भी कहा जाता है जिसमे भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। साथ ही लोग सूर्य से अपने परिवार के लिए सुख-शांति, सफलता, की कामना करते हैं। हिन्दू संस्कृति के अनुसार सूर्य की कामना एक रोग मुक्त, स्वास्थ्य जीवन की कामना होती होती है।

छठ पूजा के गीत की धुनों के साथ ही खरना का प्रसाद भी बनना शुरू हो जाता है। प्रसाद बनने के दौरान घर-घर से मिट्टी की सौंधी खुशबू भी आ आती है। मिट्टी के चूल्हे में बन रहा प्रसाद पटना के शहरी इलाके को उसके गांव और उसकी मिट्टी की भी याद भी दिलाती है।

छठ पूजा में मिट्टी के चूल्हे का खासा महत्व होता है। मिट्टी को शुद्ध माने जाने के कारण प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाया जाता है। हालांकि अब शहरी क्षेत्रों में कई लोग गैस के चूल्हे पर ही प्रसाद बनाने लगे हैं लेकिन अधिकांश घरों में आज भी खरना का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाया जाता है। मिट्टी के चूल्हे में बने प्रसाद का स्वाद भी अनूठा होता है।

गंगा पार से बड़ी मात्रा में आते हैं मिट्टी के चूल्हे

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छठ के मौके पर बाज़ार में मिट्टी के चूल्हे की बिक्री भी खूब होती है। इस बार पटना में 70 से 100 रुपये तक मिट्टी के चूल्हे की बिक्री हो रही है। मिट्टी का चूल्हा वैसे तो पटना के पूरे बाज़ार में छाया हुआ है किंतु इसका निर्माण पटना के कुछ ही इलाकों में होता है। पटना के बाज़ारों में गंगा उस पार से भी बड़ी मात्रा में मिट्टी का चूल्हा मंगाया जाता है।

ग्रामीण इलाकों में ज़्यादातर लोग खुद से ही मिट्टी का चूल्हा बनाते हैं लेकिन शहरी इलाकों में बने बनाये चूल्हे की काफी बिक्री होती है। कुछ लोग मिट्टी के चूल्हे की जगह ईंट घेर कर भी प्रसाद बनाते हैं।

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