सावन के महीने में क्यों नहीं खाना चाहिए दूध और दही? जानिये कारण

Health

दूध और दही सेहत के लिए काफी लाभदायक होता है. दहीं में अच्छे बैक्टीरिया पाए जाते हैं. जो हमारे पाचन के लिए काफी अच्छे होते हैं. इसके साथ ही दही में कैल्शियम पाया जाता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है. दही खाना आपके लिए नुकसानदायक भी साबित होता है. अगर आप इसे सावन में खाते हैं तो सावधान! आयुर्वेद के मुताबिक, सावन और बरसात के महीने में दही खाना आपकी सेहत बिगाड़ भी सकता है।

सावन में दही खाने से गले में खराश, कफ जमा हो जाना, शरीर के जोड़ों में दर्द होना, पुराना दर्द का अचानक उभर आना, पाचन में समस्या व स्त्राव की समस्या बढ़ जाती है। चूंकि सावन का महीना बारिश का माह है जिसमें शरीर के दोष इंबैलेंस हो जाते हैं। मानसून में वात बढ़ जाता है और पित्त भी इक्ट्ठा होता है। जिसके कारण हमें कई तरह की पेट संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती है। शरीर का स्वास्थ्य वात, पित्त और कफ़- इन तीनों दोषों पर निर्भर करता है। अगर ये तीनों दोष का संतुलन शरीर में बिगड़ जाए तो बीमारी होना लाजिमी है। ऐसे में आपको विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

आयुर्वेद के अनुसार, दही में अभिष्यंद गुण होता है और मानसून में शरीर के रोम छिद्र बंद हो जाते हैं। सावन में मानसून की बारिश अधिक होती है। यह स्थिति कई तरह की शारीरिक समस्याओं को बढ़ाने वाली होती है। सावन में दही खाने से शरीर में इंफेक्शन भी बढ़ सकता है। इसलिए इस मौसम में दूध से बना दही, पनीर, दही बड़ा, छाछ, इडली, ढोकला नहीं खाने की सलाह दी जाती है। दही खाने के लिए सबसे अच्छा मौसम गर्मी होता है। गर्मी के मौसम में दही का शर्बत बनाकर भी लोग पीते हैं। इससे शरीर को ठंडक मिलती है। यह लू से भी बचाती है। वही बारिश में दही खाने से शरीर में इंफेक्शन बढ़ा देता है।

बारिश के मौसम में अक्सर लोगों का का पाचन तंत्र कमज़ोर हो जाता है. जिसकी वजह से दूध और दही या फिर इनसे बनी चीजों का सेवन करने से कई बार अपच, गैस, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और एसिडिटी जैसी पेट सम्बन्धी दिक्कतें होने लगती हैं. इसलिए सावन के महीने में दूध, दही और इनसे बनी चीजों का सेवन न करने की सलाह दी जाती है.

सावन में बारिश का मौसम होता है और इसकी वजह से तमाम तरह के बैक्टीरिया वातावरण के साथ पानी में भी होते हैं. क्योंकि हर किसी के घर में वाटर प्यूरीफायर होना सम्भव नहीं है और ज्यादातर लोग टैप वाटर का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए इस पानी के दूध में मिले होने की संभावना भी बनी रहती है. दूध के सेवन से या दूध से तैयार दही और पनीर जैसी चीजों के ज़रिये ये बैक्टीरिया आपके शरीर में पहुंचने का खतरा होता है. जिसकी वजह से इम्यून सिस्टम कमज़ोर हो सकता है और आपको उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, मरोड़ और ऐंठन जैसी दिक्कतों के साथ खांसी, ज़ुकाम और बुखार जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं. इसलिए भी सावन के महीने में दूध, दही और इनसे तैयार की गयी चीजों का सेवन करने के लिए मना किया जाता है.

 

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