प्रवासी मजदूर की आपबीती- जेब में एक रुपया नहीं, सूरत से पटना तक बच्चों को पिलाया टॉयलेट का पानी

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कोरोना के कारण पूरे देश में लॉकडाउन जारी है, ऐसे में जहां-तहां पंसे प्रवासी मजदूरों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गई है ताकि वे लोग अपने घरों को लौट सकें। कई तो ऐसे भी मजदूर हैं जिनके पास ट्रेन में खाने-पीने तक की भी पैसे नहीं हैं और भूखे-प्यासे कई घंटों का सफर तय कर रहे हैं।बड़े तो भूख-प्यास बर्दाश्त कर सकते हैं लेकिन बच्चों के लिए ऐसा कर पाना मुश्किल है। जेब में एक रुपया नहीं और बच्चों की प्यास बुझाने के लिए एक मजबूर मां-बाप ने उनको ट्रेन के शौचालय का पानी पिलाया। मोहम्मद सलाउद्दीन अपनी पत्नी और तीन बच्चों को लेकर सूरत से लेकर पटना के लिए रवाना हुआ।

मोहम्मद सलाउद्दीन ने बताया कि जब वह अपने परिवार के साथ सूरत से पटना जाने वाली ट्रेन में सवार हुआ तो बोगी में भारी भीड़ थी। ट्रेन में भी न तो खाना की व्यवस्था थी और न ही पानी की, ऊपर से गर्मी ने बुरे हाल कर दिए। रास्ते में कहीं खाना-पानी मिल भी रहा था तो छीनझपटी ऐसी कि हाथ में जो भी आया सब नीचे गिर गया। अगर दस बोतल पानी आता था तो पचास लोग उसपर टूट पड़ते थे। बच्चों का प्यास से बुरा हाल हो रहा था तो उनको शौचालय के नल का पानी पिलाया। इतनी मुसीबतों के बीच सलाउद्दीन का मोबाइल भी चोरी हो गया।

सूरत से पटना तक सलाउदीन ने बच्चों को शौचालय का ही पानी पिलाया। वहीं जब पटना पहुंचे तो घर पहुंचने के लिए कोई बंदोबस्त नहीं था ऐसे में उसने अपनी पीड़ा वहीं मौजूद दो पुलिस के जवानों को सुनाई तो उनका दिल पसीज गया और उन्होंने न सिर्फ सलाउद्दीन के परिवार को खाने-पीने का सामान दिलवाया बल्कि कुछ नकद रुपए भी दिए ताकि वह अपने घर पहुंच सके। सलाउद्दीन ने कहा कि उसे ये दिन कभी नहीं भूलेंगे और न ही ट्रेन का यह सफर।

Sources:-Punjab Kesari

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