मेंहदीपुर के बालाजी हनुमान के दर पर जलती है हर चिंता की चिता !

जानकारी

मेंहदीपुर के बालाजी हनुमान – अगर आप मानसिक और शारारिक रुप से काफी थका हुआ महसुस कर रहे है.

सामाजिक, आर्थिक नुकसान की भरपाई चाह कर भी नहीं कर पा रहे है. अपने आप को काफी अकेला और हताश महसूस कर रहे हैं, तो संकटमोचन भगवान हनुमान आपके हर दूर कर सकते है आपके हर दुख और दर्द.

इसके लिए आपको खुद चलकर जाना होगा उनके दर पर यानि मेंहदीपुर यहां हनुमान जी को बालाजी के रुप में पुकारा जाता हैं.

राजस्थान में मेंहदीपुर के बालाजी हनुमान –

श्री मेंहदीपुर बालाजी मंदिर राजस्थान के दौसा जिले में स्थित है. यहां आने वाले भक्तों का विश्वास है कि श्री बालाजी हर तरह की मानसिक और शारारिक परेशानी से मुक्ति दिलाते है. जो लोग भूत -प्रेत जैसी चीज़ो में विश्वास रखते हैं, उनका मानना हैं कि भगवान दंडाधिकारी के रुप काम करते है. बालाजी अपने भक्तों को इन प्रेत-बाधाओं से मुक्ति दिलाते है. माना जाता है कि 1000 साल पहलें यहां तीन देवता प्रगट हुए थे. श्रीकोतवाल महाराज (भैरव), बालाजी और प्रेतराज सरकार. इन तीनों की ही पूजा यहां पर की जाती हैं. यहां पर लोग मिर्गी, लकवा, और बांझपन जैसी बीमारियों के इलाज के लिए भी आते है.

मेंहदीपुर के बालाजी हनुमान मंदिर की संरचना–

राजस्थान के मेंहदीपुर कस्बे में बालाजी का अतिप्रसिद्ध तथा प्रख्यात मन्दिर है. बालाजी का मन्दिर मेंहदीपुर नामक स्थान पर दो पहाड़ियों के बीच स्थित है. कहा जाता है कि यहां स्थित बालाजी की मूर्ति किसी कलाकार ने नहीं बनाई. माना जाता है कि ये खुद ही प्रकट हुई है. इसकी उत्पत्ती एक पौराणिक कथा के अनुसार बाल हनुमान द्वारा सूर्य को गेंद समझकर मुंह में दबा लेने और सूर्य को बंधन मुक्त कराने के लिए इंद्र द्वारा ब्रज प्रहार करने से संबंधित है. बताया जाता है कि इस प्रहार के कारण ही यहां की पहाड़ियों में आकृतियां उभर आई. यह मूर्ति पहाड़ के अखण्ड भाग के रूप में मन्दिर की पिछली दीवार का कार्य भी करती है. इस मूर्ति के सीने के बाईं तरफ एक छोटा सा छेद है, जिससे पवित्र जल की धारा निरंतर बह रही है. यह जल बालाजी के चरणों तले स्थित एक कुण्ड में एकत्रित होता रहता है, जिसे श्रद्धालु चरणामृत के रूप में अपने साथ ले जाते हैं.

यहां हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं. यहां बालाजी को मोतीचूर के लड्डू, भैरव बाबा को उड़द और प्रेतराज को चावल का भोग लगाया जाता है. मंगलवार और शनिवार को विशेष आरती की जाती है. जो श्रध्दालु इस स्थान पर रहते है उन्हें पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. माँस, मदिरा, प्याज आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. किसी भी स्त्री को अपने हाथ से किसी भी देवता की प्रतिमा का स्पर्श नहीं करना चाहिए.

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