Pramod daughter

Martyr Pramod | देश की आजादी के लिए पिता ने दे दिए थे प्राण, अब 6 साल की बेटी ने श्रीनगर में फहराया तिरंगा

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देश में जहां हर तरफ देश की आजादी की जश्न मनाया जा रहा है वहीं इस देश की रक्षा के लिए अपनी जान देने वाले सीआरपीएफ के शहीद कमांडेंट Pramod की छह साल की बेटी ठीक उसी जगह पर तिरंगा फहराने जा रही है जहां पिछले साल उसके पापा खड़े थे। चंद मिनटों बाद ही विदेशी आतंकियों से मुठभेड़ में Pramod शहीद हो गए थे। मरने से पहले वो दो आतंकियों को निशाने पर ले चुके थे।

छह वर्षीय आरना को लेकर श्रीनगर के करन नगर स्थित 49 वीं बटालियन में पहुंची Pramod की पत्नी नेहा त्रिपाठी ने कहा कि बेटी को यह पता चलना जरूरी है कि उसके पिता कितने बहादुर थे। बेशक जम्मू-कश्मीर ने पति को उनसे छीन लिया, लेकिन उन्हें इसका मलाल नहीं है। अरना वहीं पर झंडा फहराएगी जहां पिछले साल उसके पापा आखिरी बार खड़े थे।

पिछले साल 15 अगस्त को सुबह 8.30 बजे से लेकर 8.40 बजे तक प्रमोद अपनी बटालियन में राष्ट्रीय ध्वज फहरा रहे थे। उसी दौरान उन्हें वायरलैस पर संदेश मिला कि नौहट्टा में कुछ आतंकियों ने हमला किया है। वह बुलेटप्रूफ गाड़ी में घटनास्थल की तरफ रवाना हुए। एके-47 राइफल से उन्होंने आतंकियों का लोहा लिया, लेकिन एक गोली उनके सिर में जा लगी। वह गिरे और अस्पताल ले जाए गए। वहां उन्हें मृत घोषित किया गया।




राष्ट्रपति ने उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया है, लेकिन उससे पहले वो कई बार बेमिसाल बहादुरी के लिए पदक जीत चुके हैं। तीन साल एसपीजी (विशेष कार्य बल) में उन्होंने सेवा दी थी। इस घटना से कुछ अर्सा पहले 12 जुलाई को उन्हें कमांडेंट के पद पर पदोन्नत किया गया था। मूल रूप से वह बिहार के पटना जिले के थे, लेकिन अभी उनका परिवार झारखंड के जमतारा जिले में रह रहा था।

Pramod




उन्हें सीआरपीएफ के महानिदेशक ने तीन बार पुरस्कार से नवाजा था। उन्होंने 1998 में पहली बार देश सेवा के लिए वर्दी पहनी थी। आखिरी बार करन नगर स्थित सीआरपीएफ की 49 वीं बटालियन में वो तैनात रहे थे।






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