कभी एक MP के सर्वेंट क्वार्टर में रहते थे, आज खुद हैं सांसद

बिहारी जुनून

बुरे से बुरे परिस्थिति में भी हिम्मत न हार और लगातार संघर्ष कर अपने सपनों को पूरा करने के लिए धक्के खाना इतना आसान नहीं होता, पर जो कर पाए उस इंसान से सफलता ज्यादा दिनों तक दूर नहीं रह पाती। फर्श से अर्श तक पहुँचने की ये ददर्नाक कहानी है भोजपुरी क मशहूर गायक, एक्टर और सांसद मनोज तिवारी की।

मनोज आज जिस मुकाम पर हैं, उन्हें ये सफलता किसी सौगात में नहीं मिली। डांट, फटकार और अपमान झेलते हुए निरंतर अपने सपने को पूरा करने के लिए संघर्ष करने का जूनून उन्हें आह इतना कामयाब बना दिया। एक वक्त था जब मनोज तिवारी को एक सांसद के सर्वेंट क्वार्टर में रहना पड़ता था और आज वह खुद सांसद बन गए।

शोहरत की बुलंदियां छू रहे मनोज तिवारी आज एक गायक , अभिनेता होने के साथ ही लोकसभा के सदस्य भी हैं। इसके अलावा दिल्ली भाजपा की कमान भी उनके हाथ में सौंपी गई है।

बिहार के कैमूर जिले के अतरवलिया गांव के रहने वाले मनोज तिवारी जब छोटे थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। घर की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गयी। अभावों के वावजूद उनकी मां ने उनकी परवरिश में कभी कोई कमी नहीं रखी।

मनोज बताते हैं की उन्हें पढ़ाई के लिए गांव से दूर जाना पड़ता था। मेहनत कर मैट्रिक पास करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मिली तो बनारस चले गये। BHU में दाखिला लेने के बाद उनकी आर्थिक परेशानियां बढ़ गयी। घर में अनाज बिकने पर ही माँ रुपये भेज पाती थीं। मनोज तिवारी के पिता संगीत से जुड़े थे और संगीत में मनोज की भी बचपन से रूचि थी। यदा-कड़ा वो शौकिया गाना गाते थे।

वर्ष 1992 में एक दिन उन्हें बनारस के एक कार्यक्रम में गाने का मौका मिला जहाँ प्रशंसा के साथ ही 1400 रुपये भी मिले। उस कार्यक्रम क बाद उन्हें लगा की गायन को करियर बनाया जा सकता है।

उन्हें 1992 में BHU से ग्रेजुएशन करने के बाद भी जब कोई नौकरी नहीं मिली तो गायक बनने के इरादे से दिल्ली चले गये। एक जान-पहचान के व्यक्ति ने उन्हें एक सांसद के सर्वेंट क्वार्टर में रहने की वयवस्था कर दी। दिल्ली आने के बाद कैसेट कंपनी के दफ्तर की दौड़ शुरू हुई तो मनोज को एहसास हुआ कि जिंदगी में कुछ पाना कितना मुश्किल है।

जगह- जगह काम की तलाश में भटकते लेकिन कोई उनकी बात सुनने को तैयार नहीं होता। कई बार उन्हें ऑफिस से धक्के मार कर निकाल दिया गया। गाना सुनाने पर लोगों ने हंसी भी उड़ाई और डांट के साथ अपमानित भी किया। कई बार मनोज निराश हुए लेकिन अपनी कोशिश नहीं छोड़ी।

फिर एक दिन आया जब मनोज गुलशन कुमार से मुलाकात करने में कामयाब हो गये। गुलशन कुमार ने उनकी गायकी बहुत पसंद और मनोज का टी सीरिज से उनका एलबम निकला। फिर तो “बगल वाली जान मारे ली…” गाने से मनोज तिवारी जो रातों रात मशहूर हुए, बस फिर तो कामयाबी की सीढ़ियों पर लगातार ऊपर चढ़ते चले गए।

भोजपुरी गायक के रूप में लोकप्रिय के बाद 2003 में मनोज तिवारी ने अभिनय क क्षेत्र में कदम रखा और सिल्वर जुबली हिट रही ‘ससुरा बड़ा पइसा वाला’ फिल्म से स्टार बन गए। एक्टर के रूप में प्रसिद्धि पाने क बाद पोलिटिक्स में आ गये और आज वो उत्तर पूर्वी दिल्ली से भाजपा के सांसद हैं।

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