मंगल को जन्मे मंगल ही करते, मंगलमय हनुमान

आस्था

पटना: ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार का आलौकिक महत्व है। बड़ा मंगल को लोग’कामना पूरी’के नाम से मानते हैं। बड़ा मंगल को बजरंग बली की सच्चे मन से पूजा करने वालों को बल, बुद्धि, विद्या एवं महालक्ष्मी की प्राप्ति होती है। साथ ही श्रद्धा भाव से किए गए भक्तों की सेवाओं से भगवान राम व उनके अनन्य भक्त मारुति नंदन प्रसन्न होते हैं।

हर मंगलवार को पवनसुत हनुमान की पूजा अर्चना व दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में होड़ सी मची रहती है। ¨कतु ज्येष्ठ माह के मंगलवार को इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ माह में हनुमान जी ने भगवान राम को अपनी अनन्य भक्ति से साक्षात्कार कराया था। पंडित बजरंगी प्रसाद के मुताबिक राजा चंद्रकेतु के ऊपर शनिदेव नाराज हो गए। जिससे राजा का शनि ग्रह खराब चलने लगा। ज्येष्ठ माह में राजा नदी में नौका विहार कर रहा था और अगस्त्य मुनि उसी नदी में स्नान कर रहे थे।

राजा की नाव से ठोकर लगने से मुनि नदी में लड़खड़ा गए लेकिन, राजा को इस बात का ज्ञान नहीं हुआ। मुनि ने राजा राम से सूर्य की पूजा में विघ्न पड़ने की शिकायत करते हुए चंद्रकेतु को अधर्मी बताया। राम ने हनुमान को चंद्रकेतु का सिर काटकर लाने का आदेश दिया। लक्ष्मण को साथ लेकर बजरंगबली राजा को दंड देने निकले। इसी बीच नारद ने राजा को शनि की दशा खराब चलने के कारण भगवान राम के नाराज होने की बात कही।

कहा कि अब हनुमानजी की माता अंजना की शरण में जाकर ही तुम्हारी जान बच सकती है। राजा अंजना माता की शरण में गया और उनसे प्राणरक्षा का वरदान मांगा। राजा को ढूंढते हुए हनुमान और लक्ष्मण माता अंजना के पास पहुंचे। बजरंगबली ने माता को प्रणाम किया। अंजना माता ने बजरंग बली से एक व्यक्ति की जीवन रक्षा का प्रण लिया। उसके बाद चंद्रकेतु को सामने करते हुए कहा कि इसी के प्राण की रक्षा करनी है। जिस पर बजरंगबली ने पूंछ बड़ी कर एक दीवार बना दी।

लक्ष्मण ने भगवान राम के आदेश की बात कही तो हनुमान ने कहा कि प्रभु ने पिता के आदेश पर 14 वर्ष वनवास काटा है। मैं भगवान का सेवक हूं। इसलिए मैं भी माता की आज्ञा का पालन करूंगा। लक्ष्मण ने श्रीराम को इसकी सूचना दी। जिसके बाद बजरंगबली व राम के बीच भीषण युद्ध हुआ। राम ने हनुमान पर वज्र शक्ति का प्रहार करने के लिए बाण का संधान किया। जिस पर बजरंगबली ने अपना सीना फाड़ दिया। जिसमें राम व सीता की मूरत समाई थी।

तभी वहां भोलेनाथ प्रकट हुए और कहा कि अगर आप हनुमान पर वज्र चलाते हैं तो पूरी सृष्टि नष्ट हो जाएगी। हनुमान आप के परम भक्त हैं। जिसका प्रमाण उन्होंने सीना फाड़ कर दे दिया है। भोलेनाथ व श्रीराम ने हनुमान को वरदान दिया कि ज्येष्ठ माह के सभी मंगलवार को उनकी विशेष पूजा होगी। इस माह हनुमान का दर्जा राम से भी बड़ा होगा।

इसी मान्यता के चलते ज्येष्ठ माह के सभी मंगलवार को बड़ा मंगल मानते हुए श्रद्धालु विशेष पूजा अर्चना करते हैं। बताया कि ज्येष्ठ मास की दशमी को रामेश्वर पुल की स्थापना के लिए श्रीराम ने शिव की आराधना की थी। इसी उपलक्ष्य में गंगा दशहरा भी मनाया जाता है।

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