मंडी जाने का झंझट न ढुलाई की चिंता, बिहार के युवा इंजीनियर ने किया कमाल, गांव से ही बेचें अनाज, पेमेंट भी आनलाइन

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अनाज की बिक्री औने-पौने दाम पर करने की मजबूरी को खत्म करने और खास उत्पादों के सिमटे दायरे को आसमानी बुलंदी देने में स्टार्टअप प्रिंस राज को सफलता तो मिली है, लेकिन इरादा बड़ा है। हर गांव में क्रय केंद्र खोलकर वे घर से ही अनाज बेचने की सुविधा दे रहे हैं। इसके साथ ही भुगतान भी आनलाइन। जीआइ टैग वाले देश के सबसे महंगे दोन बासमती की ब्रांडिंग कर रहे हैं। आनंदी चावल का भूजा, मिरचा चूड़ा का दायरा बढ़ा रहे हैं। ये बिहार के पश्चिम चंपारण की ऐसी उपज है, जो कहीं नहीं मिलती।

इंजीनियरिंग के बाद शुरू किया स्टार्टअप

प्रिंस राज पश्चिम चंपारण के सोनवा गांव के निवासी हैं। एनआइटी सिक्किम से बीटेक करने के बाद वर्ष 2019 में उन्होंने स्टार्टअप की दिशा में कदम बढ़ाया। नई सोच को देखकर वर्ष 2020 में ही भारत सरकार, फिर बिहार सरकार ने उन्हें स्टार्टअप का दर्जा दिया। बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन उनको इंक्यूबेशन सेंटर मिला और एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष केपीएस केशरी इनके मेंटर बने। एग्रीधन ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से उन्होंने फर्म को निबंधित कराया।

पांच लाख रुपये से हुई शुरुआत 

प्रिंस राज कहते हैं, पांच लाख रुपये से मैंने वर्ष 2019 में एनआइटी सिक्किम के प्रोफेसर महेश चंद्र गोविल के दिशा-निर्देशन में शुरुआत की थी। बाद में स्टार्टअप बना और अब टर्नओवर ढाई करोड़ रुपये है। किसानों का धान, गेहूं, मसूर, अरहर, सरसों, तीसी, चावल दूसरे प्रदेशों में एग्रीधन के माध्यम से जा रहा है।

हर गांव में क्रय केंद्र खोल अनाज बेचने की सुविधा 

प्रिंस राज कहते हैं, किसानों को अपना अनाज लेकर दूर मंडी में जाना पड़ता है, अगर खरीदार नहीं मिला तो फिर कई बार जाना पड़ता है। इससे ढुलाई खर्च बढ़ता है और मुनाफा नहीं हो पाता है। इसलिए हर गांव में क्रय केंद्र खोल अनाज बेचने की सुविधा दे रहा हूं। आनालाइन खाते में पैसे का भुगतान होता है। बिहार के हर गांव में मंडी खोलने की योजना है।

खास उत्पादों की ब्रांडिंग

प्रिंस राज ने कहा कि हर जिले में कुछ खास उत्पाद हैं। इनका दायरा सिमटा है। कुछ उत्पादों को जीआइ टैग भी मिला है लेकिन ब्रांडिंग नहीं हो पाई है। पश्चिम चंपारण के दोन बासमती को भी जीआइ टैग मिला है। देश के इस सबसे महंगे खुशबूदार चावल की कीमत 210 रुपये प्रति किलो है। इसी तरह से भूनने पर आनंदी चावल का हर दाना लावा बन जाता है। सुगंधित मरचा चूड़ा पानी या दूध में डालते ही गल जाता है। इन्हें बढ़ावा दे रहा हूं। दूसरे प्रदेशों में भी नेटवर्क बढ़ाना को पूंजी की जरूरत है। एंजल इन्वेस्टर से मदद रही है।

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