तेजस विमान बनाकर इतिहास रचने वाले इस बिहारी का लोहा डॉ कलाम ने भी माना था

बिहारी जुनून

अभावों से घिरे रहने पर भी हौसला हो तो प्रतिभा अपनी मंजिल का रास्ता खुद ढूंढ लेती और सफलता की ऊँचाइयाँ छूती है। ऐसी ही एक कहानी है दरभंगा जिले के डॉ मानस बिहारी वर्मा की जिनके साल में छह महीना बाढ़ में दूवे रहने वाले गांव जाने के लिए आज भी सड़क नहीं है।

भारत के लड़ाकू विमान तेजस के निर्माता डॉ मानस बिहारी वर्मा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ काम कर चुके हैं। और आज भी श्री वर्मा अपने दिवंगत मित्र अब्दुल कलाम के सपने को पूरा करने की कोशिश में लगे हुए हैं।

दरभंगा के घनश्यामपुर प्रखंड अंतर्गत पूर्वी एवं पश्चिमी कमला तटबंध के मध्य अवस्थित छोटे से गांव बाउर में 1946 में जन्मे डॉ मानस बिहारी वर्मा की प्राम्भिक पढ़ाई गांव के ही जवाहर हाइस्कूल, मधेपुर में हुई है।

यहां से 10वीं पास कर पटना साइंस कॉलेज और फिर बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज से उच्च और तकनीकी की शिक्षा प्राप्त की। फिर सागर विश्वविद्यालय से एमटेक की डिग्री प्राप्त करने के बाद अपने ज्ञान और विज्ञान के से देश सेवा में लीन हो गए।

श्री वर्मा ने देशहित के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का सफलतापूर्वक संपादन किया है लेकिन मिसाइलमैन के नाम से प्रसिद्ध पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के साथ किया गया ‘तेजस’ प्रोजेक्ट उन्हें आज भी आह्लादित और गौरवान्वित करता है।
डॉ वर्मा तेजस प्रोजेक्ट की यादें तजा करते हुए बताते हैं कि 1986 में तेजस युद्धक विमान बनाने के लिये जो टीम गठित किया गया था उसमे लगभग 700 इंजीनियर शामिल किये गए थे।

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