मलकपुर में बनेगी सेंट्रल यूनिवर्सिटी, हटाए जाएंगे 100 आदिवासियों के मकान!, स्थल चयन टीम को ये जमीन आई पसंद

जानकारी

भागलपुर कहलगांव के मलकपुर में सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनेगी। इसके लिए करीब 215 एकड़ जमीन मांगी गई है। ऐसे में कहलगांव के सीओ से उस गांव व उसके आसपास की 215 एकड़ की जमीन ढूंढकर प्रस्ताव भेजने को कहा गया है। यूनिवर्सिटी निर्माण के लिए पहले परशुरामचक और एकडारा मौजे की जमीन तय की गई थी, लेकिन 11 फरवरी को स्थल चयन के लिए आयी टीम ने किसानों से बातचीत में जलजमाव होने की समस्या जानकर इसे रद्द कर दिया

हालांकि, उसी दिन टीम में शामिल साउथ बिहार के वाइस चांसलर केएन सिंह, यूजीसी के संयुक्त सचिव जितेंद्र कुमार त्रिपाठी, शिक्षा मंत्रालय के निदेशक सुभाष चंद्र शारु, शिक्षा मंत्रालय के अवर सचिव पीके सिंह तथा सीपीडब्ल्यू के चीफ इंजीनियर यूएन विवेक ने संकेत दिए थे कि मलकपुर या बियाडा की जमीन परशुरामचक और एकडारा से बेहतर है। मलकपुर मौजा विक्रमशिला महाविहार से सटे अंतीचक पंचायत का हिस्सा है। यहां विशाल भूखंड भी है। जमीन ऊंची है और जलजमाव की समस्या भी नहीं है। यदि यहां सेंट्रल यूनिवर्सिटी बन जाती है तो विक्रमशिला महाविहार की किस्मत भी चमक जाएगी। साथ ही बटेश्वर मंदिर भी राष्ट्रीय फलक पर आ जाएगा।

एडीएम राजेश झा राजा ने बताया कि टीम को मलकपुर की जमीन ज्यादा पसंद आयी है और इसकी मांग की गई है, लेकिन वहां काफी दिक्कत है। हमलोगों ने जांच कर पाया कि वहां 100 से अधिक आदिवासियों के मकान-जमीन हैं। घना जंगल है। आमलोगों के भी काफी मकान तोड़ने पड़ेंगे। कुछ जमीन पर तिब्बतियों का अध्ययन स्थल है। 100 से अधिक फलदार पेड़ हैं। इन सभी की शिफ्टिंग बड़ी समस्या होगी। मलकपुर की जमीन की समस्या और परशुरामचक व एकडारा की जमीन की खासियत को लेकर शिक्षा विभाग को रिपोर्ट देंगे। फिर जो चयन होगा, उसके हिसाब से काम किया जाएगा।

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