मिथिलांचल की पहचान ‘मखाना’ : 100 में से 90 देशों के लोग इंतजार करते हैं, बिहार के इस DRY FRUIT का!

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देश में लगभग 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने की खेती होती है, जिसमें 80 से 85 फीसदी उत्पादन अकेले बिहार में होता है।

सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्र एक खासियत के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। और वह खासियत है यहां का वर्ल्ड फेमस मखाना। आपको जानकार हैरत होगी कि देश ही नहीं, बल्कि, दुनिया के 100 में से 90 देशों के लोग उत्तर-पूर्वी बिहार में पैदा होने वाले माखनों को बड़े चाव से खाते हैं। दुनिया के मखाना उत्पादन में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 85 से 90 फीसदी है। पर, एक सच यह भी है कि यहां का मखाना उद्योग उतना आर्गनाइज नहीं है, जितना उसे होना चाहिए था। हर बार की तरह इस बार के चुनाव में भी नेताओं ने इस उद्योग के विकास सिफ वादे किए हैं।



कहां-कहां होती है इनकी खेती

बिहार में मखाना के उत्पादन के लिए दरभंगा, मधुबनी, सुपौल और समस्तीपुर जिले जाने जाते हैं। मधुबनी जिले में ही 25,000 से ज्यादा तालाब हैं, जहां मखाने की खेती होती है।

90 फीसदी मखाना की खेती सिर्फ बिहार में

देश में लगभग 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मखाने की खेती होती है, जिसमें 80 से 90 फीसदी उत्पादन अकेले बिहार में होता है। इसके उत्पादन में 70 फीसदी हिस्सा सिर्फ मिथिलांचल का है।लगभग 120,000 टन बीज मखाने का उत्पादन होता है, जिससे 40,000 टन मखाने का लावा प्राप्त होता है। देश में मखाने का कुल कारोबार 550 करोड़ रुपए का है।

कई फायदे हैं मखाने खाने के:

प्रति 100 ग्राम भुने मखाने में 9.7 फीसदी प्रोटीन, 75 फीसदी कार्बोहाइड्रेट, आयरन और वसा के अलावा 382 किलो कैलोरी मिलती है। इसमें दूध और अंडे के मुकाबले ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है। अगर इसे नियमित खाया जाए तो यह काफी हेल्दी है।

कैसे बनता है मखाना,और इसे खाने के लाभ

मखाना एक लो कैलोरी हेल्दी फूड है और भारत के लगभग हर हिस्से में यह खाया जाता है लेकिन अधिकांश लोगों को शायद मालूम नहीं है कि मखाना बनता कैसे है। बिहार के मिथिलांचल में भारत का अधिकांश मखाना पैदा किया जाता है। हम आपको बता रहे हैं कि मखाना बनाने की पूरी प्रोसेस।

1. मखानो की खेती उथले पानी वाले तालाबो में की जाती है और बिहार में मिथिलांचल में ही मखाने की सबसे ज्यादा खेती होती है, पुरे देश का करीब 80% मखाना बिहार में ही उगाया जाता है |
2. “कुरूपा अखरोट” नाम की एक घास के बीज को ही उबाल कर और फिर इसे भून कर मखाना बनाया जाता है |
3. मखाने का सबसे बड़ा लाभ यह है की इसे उगाने के लिए खाद या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं होता इसीलिए इसे आर्गेनिक भोजन भी कहा जाता है |
4. मखानो को फोक्स्नट अथवा प्रिकली लिली, जिसका मतलब होता है कांटे युक्त लिली भी कहते है क्योंकि इसमें छोटे छोटे कांटे भी होते है |
4. मखानो को फोक्स्नट अथवा प्रिकली लिली, जिसका मतलब होता है कांटे युक्त लिली भी कहते है क्योंकि इसमें छोटे छोटे कांटे भी होते है |
6. मणिपुर के कुछ इलाको में इसकी जड़ और पत्तो के डंठलो की भी सब्जी बनाई जाती है |
7. अपने औषधीय गुणों के कारण अमेरिकन हर्बल फ़ूड एसोसिएशन ने मखाने को क्लास वन फ़ूड का दर्जा दिया हुआ है |

मखाने के औषधीय लाभ

1. मखाने में एंटीओक्सीडेंट होते है, जिस कारण चेहरे पर झुर्रिया नहीं पढ़ती और बढती उम्र का असर चेहरे पर नज़र नहीं आता
2. मखाना खाने से वजन पर नियंत्रण होता है क्योंकि इसमें फैट की मात्रा बहुत ही कम होती है और इसीलिए यह वजन कम करने में सहायक है |
3. मखाना में फाइबर की मात्र ज्यादा होती है जिस कारण कब्ज की समस्या नहीं होती और पाचन क्रिया सही रहती है |
4. मखाना के सेवन से हार्ट प्रॉब्लम में भी लाभ मिलता है क्योकि इसमें कोलेस्ट्रोल लेवल बहुत कम होता है जिससे हार्ट प्रॉब्लम से आप बचे रहते हैं |
5. मखाने के नियमित सेवन से शुगर में भी लाभ होता है और आप डायबिटीज से बचे रहते है |
7. रोज कुछ मात्र में मखाना खाने से शरीर में कैल्शियम की कमी दूर होती है जिससे हड्डियां मजबूत होती है और जोड़ो के दर्द में भी आराम मिलता है |
8. मखाने में पोटेशियम की अधिक मात्रा होती है जिस कारण BP कण्ट्रोल में रहता है |

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