बाबा बैद्यनाथ धाम की गिनती देश के पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में की जाती है। शास्त्रों में भी बैद्यनाथ धाम की महिमा का विस्तृत वर्णन किया गया है। यहां स्थित पवित्र देश के सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगों में बैद्यनाथ धाम स्थित ज्योतिर्लिंग को कामना लिंग के रुप में भी जाना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और पूर्ण समर्पण के साथ बाबा से जो भी कामना की जाती है वह अवश्य हीं पूरी होती है। यही कारण है कि श्रावण मास के अलावा भी सालों भर यहां श्रद्धालूओं का तांता लगा रहता है और श्रावण में तो श्रद्धालूओं की बाबा के प्रति श्रद्धा देखते हीं बनती है।

शास्त्रांे के अनुसार आत्मलिंग से जिन बारह ज्योतिर्लिंग का प्रादुभाव हुआ उनमें बैद्यनाथ धाम स्थित पवित्र ज्योतिर्लिंग को मूल लिंग माना जाता है। जानकारों की मानंे तो देवघर में शिव और शक्ति एक साथ विराजमान है। ऐसी मान्यता है कि सती का अंग जहां-जहां गिरा वहां शक्तिपीठ कहलाया।

शास्त्रों में भी इस बात का उल्लेख है। खास बात यह है कि माता सती का हृदय जिस जगह गिरा था वहीं पर पवित्र कामना लिंग स्थापित है। यह इस शैव स्थल की खास विशेषता है जो अन्य ज्योतिर्लिंगों से बैद्यनाथ धाम को अलग महत्व देता हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां सच्ची श्रद्धा से बाबा से जो भी याचना की जाती है वो अवश्य पूरी होती है। जानकारो की मानें तो राक्षस राज रावण जैसे पंडित को भी यह पहले से ज्ञात था। यही कारण है कि रावण बैद्यनाथ को अपनी लंका ले जाना चाहते थें।

पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में बैद्यनाथ धाम स्थित पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग की इसी महत्ता के कारण प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक करने 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर आते हैं और अपनी कामना की झोली भर कर लौटते हैं।

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