महिला क्रिकेटर ने BCA के सीईओ पर लगाए संगीन आरोप, सौरव गांगुली को लिखे पत्र में कहा- दलित हूं सर…

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 बिहार की एक महिला क्रिकेटर ने बीसीए (बिहार क्रिकेट एसोसिएशन) के सीईओ के खिलाफ संगीन आरोप लगाते हुए बीसीसीआई को पत्र लिखा है। अपने पत्र की कॉपी उसने बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली, सचिव जय साह के साथ-साथ बीसीए उपाध्यक्ष दिलीप सिंह, कोषाध्यक्ष आशुतोष नंदन, संयुक्त सचिव कुमार अरविंद को भेजी है। इसके अलावा पत्र को महिला आयोग दिल्ली और पटना को भी फारवर्ड किया गया है।

मामला जमुई जिले की महिला क्रिकेटर ज्योति कुमारी का है। ज्योति ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हुए सीईओ मनीष राज पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्योति ने बिहार क्रिकेट संघ, पटना को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘सूचित कर रही हूं कि मेरा चयन बिहार महिला टी-20 टीम में हुआ है। वेबसाइट पर जारी सूची में मेरा नाम 25वें स्थान पर है। मैं जमुई जिले के नक्सल इलाके से आती हूं। वहां मैंने विपरित परिस्थितियों में महिला क्रिकेट को बढावा देने के लिए क्रिकेट खेलना शुरू की। मैं बहुत ही गरीब और दलित परिवार से आती हूं। काफी मेहनत के बाद मेरा चयन सत्र 2019-20 में स्टेट टीम में हुआ था। उसके बाद पुन: मेरा चयन सत्र 2021-22 के टी-20 महिला टीम में हुआ है। परंतु बहुत ही दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा कि सूची प्रकाशित होने से पहले बिहार क्रिकेट संघ के सीईओ मनीष राज ने टीम चयन के लिए पांच लाख की मांग कर दी। उनके इस आचरण मैं बहुत ही आहत हुई। इसके बाद सूची प्रकाशित हुई।

ज्योति ने आगे लिखा, ‘सूची प्रकाशित होने के बाद वे उक्त राशिको उन्होंने होटल कामत का बिल सहित अन्य खर्चों के मद में भुगतान करने की बात कही। चूंकि मैं इतना पैसा नहीं दे सकती हूं।इसलिए मैंने उन्हें फोन कर सूची से नाम हटाने की बात कही। महोदय मैं इतना पैसा देने में सक्षम नहीं हूं। इसलिए मैं आपसे और पूरी कमेटी आफ मैनेजमेंट से आग्रह करती हूं कि मेरा नाम सूची से हटा दिया जाए। उनके इस कारनामे से एक दलित लड़की की मानसिक स्थिति का ह्रास हुआ और मनोबल टूटा है। मैं पूरी कमेटी से आग्रह करती हूं कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और सीईओ पर कड़ी कार्रवाई करने की कृपा करें। ताकि बिहार क्रिकेट संघ को बदनाम करने वाले ऐसे चेहरे से मुक्ति मिल सके। महोदय अगर मुझे इंसाफ नहीं मिला, तो मैं न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर हो जाऊंगी।’

नहीं मिला फीडबैक तो…

ज्योति ने यह पत्र 12 अप्रैल को भेजा। इसके बाद 24 घंटे बीत गए लेकिन उधर से कोई फीडबैक नहीं मिला। लिहाजा, ज्योति ने 13 अप्रैल को एक और मेल किया। अपने मेल में ज्योति ने लिखा, सर प्रणाम 24 घंटे के बाद भी मेरे आवेदन पर कोई विचार नहीं किया गया, क्या मैं मन लूं, इसमें आपकी भी मौन सहमती है? अगर आपके दरवाजे से भी एक गरीब और दलित लड़की का इंसाफ नहीं मिला तो मैं आगे थाना और न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को स्वतंत्र हूं।

बनाया जा रहा दबाव- ज्योति

13 अप्रैल की शाम को ही ज्योति ने एक और मेल करते हुए आरोप लगाते हुए लिखा, ‘सर प्रणाम, क्रिकेटिंग इनचार्ज संजय सर द्धारा माफी नामा लिखकर देने का दवाब बनाया जा रहा हैं। यह बिल्कुल ही अनूचित है।

आप जानते है की नारी दुर्गा और काली का रूप होती हैं। इंसाफ के लिए अंतिम सांस तक लड़ने की ताकत नारी शक्ति में होती हैं। मैं जानती हूं कि आप सहित बिहार क्रिकेट संघ के सभी कमेटी ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य इंसाफ पसंद लोग है। मैं अभी महिला टी20 टीम के साथ जा रही हूं, वहा से लौटने के बाद पूरी कमेटी ऑफ मैनेजमेंट के सामने उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना चाहती हूं। उसके बाद जिसकी गलती होगी और मैनेजमेंट के सदस्य जो निर्णय लेंगे वो मैं सहर्ष स्वीकार करने के लिए तैयार रहूंगी।

सीईओ ने रखा अपना पक्ष, दी ये दलील…

इधर, स्टेट प्लेयर के आरोप के बाद सीईओ मनीष राज ने अपना पक्ष रखते हुए बीसीए मैनेजमेंट को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने लिखा, मेरे नाम एवं पद का दुरुपयोग किया जा रहा है। विभिन्न माध्यमों से सूचना मिली है। खिलाड़ियों एवं जिला संघों के बीच भ्रम एवं पैसे की उगाही की जा रही है। ऐसी जानकारियां पहले से मुझे मिलती रहीं हैं। 11 अप्रैल को कुछ खिलाड़ियों का फोन मेरे पास आया, जिसमें मेरे नाम पर पैसों के लेनदेन की बात बताई गई। इससे पहले इन खिलाड़ियों से मेरी कभी बात नहीं हुई।

एंटी करप्शन से हो जांच- सीईओ 

सीईओ ने आगे लिखा कि आग्रह है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, कमिटी बनाई जाए या बीसीए के एंटी करप्शन के द्वारा इसकी जांच की कार्रवाई की जाए। ताकि दोषियों की पहचान हो सके और बिहार क्रिकेट संघ और मेरी छवि को बचाया जा सके।

यहां बता दें कि ज्योति कुमारी बिहार क्रिकेट टीम के लिए टी-20 मैच खेलने त्रिवेंद्रम रवाना हो चुकी हैं। इधर, इन आरोपों के बाद एक दफा फिर बीसीए की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। इससे पहले भी बीसीए पर कई आरोप लगाए गए हैं।

 

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