महाराष्ट्र की अमान्य डिग्री पर बिहार में सैकड़ों उम्मीदवार का हुआ चयन, जानें मामला

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महाराष्ट्र में शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक के पद पर बहाल होने के लिए सीपीएड व बीपीएड की जो डिग्री अमान्य है, उसपर बिहार में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी नियुक्त होने पहुंच गये हैं। ऐसे सैकड़ों डिग्रीधारी चयनित भी हो गये लेकिन जब नियोजन इकाई और जिलों के शिक्षा महकमे के अफसरों की इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने विभाग से तत्काल संपर्क किया।

खास बात यह है कि ज्यादातर वैसे सर्टिफिकेट जो ‘संदेह’ के घेरे में हैं वे महाराष्ट्र के अमरावती के संस्थान से प्राप्त हैं। प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने अमरावती से प्राप्त अभ्यर्थियों की डिग्री पर तत्काल नियोजन रोकने का निर्देश दिया है। दरअसल, राज्य के 8386 मध्य विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक पद पर अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों को 28 मई (शनिवार) को प्रखंड नियोजन इकाइयों द्वारा नियुक्ति पत्र वितरित किया जाना था।

इसके पूर्व 12 मई को मेधा सूची में चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र सत्यापन व काउंसिलिंग के लिए बुलाया गया था। नियोजन इकाई और जिलों के विभागीय अफसर कई चयनित अभ्यर्थियों के सीपीएड व बीपीएड प्रमाण देखकर चौंके। प्रमाणपत्र अमरावती से जुड़े संत गाडगे बाबा अमरावती विद्यापीठ समेत इसी शहर के अन्य आधा दर्जन संस्थानों से निर्गत हुए हैं। इनपर लिखा था- ‘यह सर्टिफिकेट महाराष्ट्र में मान्य नहीं है’।

यह देखकर अफसरों के कान खड़े हो गये कि प्रमाणपत्र निर्गत होने वाला राज्य ही जब मान्यता नहीं दे रहा है तो इसपर बिहार में कैसे नियुक्त की जाय। फिर जिलों ने प्राथमिक निदेशालय और शिक्षा विभाग से संपर्क साधा और तत्काल ‘अमरावती’ डिग्रीधारियों को नियुक्ति पत्र देने पर रोक लगा दी गई। इन डिग्रीधारियों की संख्या सैकड़ों में बतायी जा रही है। अभ्यर्थियों में अपने राज्य के साथ ही कुछ पड़ोसी राज्य के भी अभ्यर्थी शामिल हैं।

एनसीटीई से जांच के बाद होगा निर्णय 

प्राथमिक निदेशक के निर्देश पर सभी जिलों के डीईओ ने आदेश निर्गत कर ‘अमरावती’ डिग्री पर नियुक्ति पत्र नहीं बांटने का फैसला किया है। अब जिले सत्रवार अमरावती के संबंधित संस्थान की मान्यता एनसीटीई के साइट से अथवा उससे संपर्क कर परखेंगे। जांच में जिनकी डिग्री वैध पायी जाएगी, उन्हें ही विभाग से निर्देश मिलने के बाद नियोजन पत्र मिल पाएगा। जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के अमरावती में सीपीएड व बीपीएड की डिग्री देने वाले करीब डेढ़ दर्जन संस्थान हैं, जिनमें आधा दर्जन की डिग्री संदेह के घेरे में है। जिलों में सबसे अधिक चर्चा में संत गाडगे बाबा अमरावती विद्यापीठ की डिग्री की है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अकेले बेगूसराय में कुल चयनित 77 में से 55 ‘अमरावती’ डिग्रीधारी हैं।

कितने हुए नियोजन, एक-दो दिन में बताएंगे जिले 

प्राथमिक निदेशक ने सभी जिलों को 8386 शारीरिक शिक्षा अनुदेशक पद पर चल रही बहाली में रिक्त रह गए पदों को 28 मई को ही एनआईसी के वेबसाइट पर अपलोड करने का आदेश दिया था। हालांकि अमरावती डिग्री का मामला उजागर होने के बाद अब इसमें देर लग सकती है। सोम-मंगल को जिले विभाग को ब्योरा भेजेंगे तब पता चलेगा कि कुल कितने नियोजन हुए। बिहार बोर्ड से महज 3523 पात्र घोषित थे, सूचना के मुताबिक इनमें से आधे को भी नियुक्ति पत्र नहीं मिल पाया है।

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