21 फरवरी 2020 (शुक्रवार) को मनाया जा रहा है. शिवरात्रि के मौके पर कर्नाटक के कलबुर्गी में ब्रह्मा कुमारी में 300 किलो अरहर से शिवलिंग बनाया गया, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी.

 कलबुर्गी के इस मंदिर में भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए देर रात से ही भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी. इस शिवलिंग को बनाने में एक हफ्ते का वक्त लगा. दूर-दराज से शिवभक्त इस यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं.

कलबुर्गी के इस मंदिर में भगवान शिव को जल चढ़ाने के लिए देर रात से ही भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी. इस शिवलिंग को बनाने में एक हफ्ते का वक्त लगा. दूर-दराज से शिवभक्त इस यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं.

 ओडिशा में, भुवनेश्वर की जटनी के एक कलाकार एल ईश्वर राव ने महाशिवरात्रि के अवसर पर एक छोटी सी बोतल के अंदर एक पेंसिल की निब पर और एक पत्थर पर छोटा सा शिवलिंग बनाया.

ओडिशा में, भुवनेश्वर की जटनी के एक कलाकार एल ईश्वर राव ने महाशिवरात्रि के अवसर पर एक छोटी सी बोतल के अंदर एक पेंसिल की निब पर और एक पत्थर पर छोटा सा शिवलिंग बनाया.

 महा शिवरात्रि, जिसका शाब्दिक अर्थ शिव की सबसे बड़ी रात है, देश भर में सबसे शानदार त्योहारों में से एक है. इस दिन विनाश के स्वामी भगवान शिव का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था. जिन्हें शक्ति (शक्ति) के रूप में भी जाना जाता है.

महा शिवरात्रि, जिसका शाब्दिक अर्थ शिव की सबसे बड़ी रात है, देश भर में सबसे शानदार त्योहारों में से एक है. इस दिन विनाश के स्वामी भगवान शिव का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था. जिन्हें शक्ति (शक्ति) के रूप में भी जाना जाता है.

 हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती को ले जाने के लिए शादी की रात, भगवान शिव के साथ देवी-देवताओं, जानवरों, और राक्षसों सहित परिचितों का एक बहुत ही बड़ा समूह था. शिव और शक्ति की जोड़ी को प्रेम, शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक माना जाता है.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती को ले जाने के लिए शादी की रात, भगवान शिव के साथ देवी-देवताओं, जानवरों, और राक्षसों सहित परिचितों का एक बहुत ही बड़ा समूह था. शिव और शक्ति की जोड़ी को प्रेम, शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक माना जाता है.

Sources:-News18

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