‘ॐ नम: शिवाय’ को क्यों कहा जाता है महामंत्र, जान लें इसकी महिमा

आस्था

शिव भक्तों को अक्सर एक सवाल बहुत ज्यादा परेशान करता है और वो है कि महाशिवरात्रि पर किस मंत्र का जाप किया जाए. दरअसल शिव से ही महामृत्युंजय भी जुड़े हैं जिनका मंत्र मौत को भी मात देता है. मंत्रों के बारे में कहा जाता है कि यह जितना आसान होगा, साधक की जबान पर उतनी ही तेजी से चढ़ेगा. ऐसे में ‘ॐ नम: शिवाय’ ऐसा ही एक मंत्र है जिसे हर शिवभक्त अपनी चेतना के साथ-साथ जिंदगी का भी हिस्सा बना लेता है. इसका कारण ये है कि इस मंत्र का ध्यान, मनन करना बहुत आसान है. इसलिए जाप में भी इसे सर्वोत्तम स्थान दिया गया है.


मंत्रों के जाप से होती है परम साधना
तन-मन को एकाग्र कर मंत्र का जाप करना इंसान के लिए आध्यात्मिक मार्ग की शुरुआत के बराबर है. यही साधना भी है. हिंदू धर्म में आध्यात्मिक ऊर्जा को उच्च स्तर पर ले जाने के लिए मंत्रों को सर्वोत्तम जरिया माना जाता है. यह भी देखा जाता है कि जितनी ऊर्जा और स्फूर्ति मंत्रों के जाप से मिलती है, वह सामान्य पूजा में संभव नहीं हो पाती है.

ॐ नम: शिवाय वह मूल मंत्र है, जिसे कई सभ्यताओं में महामंत्र माना गया है.

ऐसे में ‘ॐ नम: शिवाय’ वह मूल मंत्र है, जिसे कई सभ्यताओं में महामंत्र माना गया है. इस मंत्र का अभ्यास अलग-अलग तरीकों से कर सकते हैं जैसे कि माला के साथ जपें या मनन के साथ. इसे सांस के आने-जाने से भी जोड़ा जा सकता है. बस लक्ष्य होना चाहिए कि उस परमात्मा तक कैसे पहुंचा जाए जिसे परमेश्वर या ईश्वर का दर्जा दिया गया है.



‘ॐ नम: शिवाय’ का प्रतीकदिखने में छोटा सा यह मंत्र अपने आप में पांच मंत्र के बराबर है. यही कारण है कि इसे पंचाक्षर का दर्जा दिया गया है. ये पंचाक्षर प्रकृति में मौजूद पांच तत्वों के प्रतीक हैं और शरीर के पांच मुख्य केंद्रों को भी दर्शाते हैं. साधना के तहत मंत्र के पंचाक्षरों से शरीर के पांच केंद्रों को जाग्रत किया जा सकता है.

इसलिए जाप करने से मन और बुद्धि तो शुद्ध होती ही है, ये आसपास के सिस्टम को भी शुद्ध कर शक्तिशाली बना देता है. यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि इसका इस्तेमाल आप किस स्तर तक कर पाते हैं.

शिव महापुराण में बताया गया है कि ॐ नम: शिवाय के समान कहीं कोई दूसरा मंत्र नहीं है.

इसके समान कोई दूसरा मंत्र नहीं
शिव महापुराण में बताया गया है कि ‘ॐ नम: शिवाय’ के समान कहीं कोई दूसरा मंत्र नहीं है. हालांकि हिंदू धर्म में कुल सात करोड़ मंत्र और कई उपमंत्र हैं लेकिन इस मंत्र जैसा कोई नहीं है. ऐसा माना जाता है कि जिसने ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र को जप साधना बना लिया है उसने सभी शास्‍त्र पढ़ लिए और समस्‍त अनुष्‍ठानों को पूरा कर लिया.


शिव पुराण के अध्‍याय 12 में यहां तक कहा गया है कि ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र के जप में लगा हुआ पुरुष यदि पंडित, मूर्ख, अन्‍त्‍यज अथवा अधम भी हो तो वह पाप कर्मों से मुक्‍त हो जाता है.

Sources:-News18

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