हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाली गुप्त नवरात्रि का आरंभ आज से हो रहा है. माघ महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है. ऐसा कहा जाता है कि माघ महीने में होने वाली नवरात्रि का ज्ञान कम ही लोगों को होता है इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है. इस नवरात्रि में विशेष कामनाओं की सिद्धि की जाती है.

गुप्त नवरात्रि में मां भगवती की आराधना का विशेष महत्व माना गया है. आम नवरात्रों में मां की आराधना सात्विक और तांत्रिक दोनों ही करते हैं, लेकिन गुप्त नवरात्रों में माता की साधना ज्यादातर तांत्रिक ही करते हैं. अमूमन गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली माता की आराधना का प्रचार, प्रसार नहीं किया जाता है. पूजा, मंत्र, पाठ और प्रसाद सभी चीजों को गोपनीय रखा जाता है. ऐसी मान्यता है कि गुप्त नवरात्रों में माता की पूजा को जितना गोपनीय रखा जाता है, फल उतना ही बेहतर प्राप्त होता है.

गुप्त नवरात्र की पूजा विधि
बाकि के नवरात्रों की तरह गुप्त नवरात्रों में भी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है. पूजा के पहले दिन संकल्प लेते हुए माता की प्रतिमा और कलश को स्थापित करना चाहिए. इसके बाद नौ दिन तक माता की विधिवत पूजा और आरती करनी चाहिए. अष्टमी या नवमीं के दिन कन्या पूजन के साथ नवरात्र का उद्यापन करना चाहिए. जो लोग गुप्त नवरात्रि में व्रत रख रहे हैं, उन्हें भी इसी विधि से पूजा-पाठ करना चाहिए.

किस दिन करें, कौन सी देवी की पूजा
25 जनवरी – घट स्थापना (मां शैलपुत्री)
26 जनवरी – मां ब्रह्मचारिणी
27 जनवरी – मां चंद्रघंटा
28 जनवरी – मां कुष्मांडा
29 जनवरी – मां स्कंदमाता
30 जनवरी – मां कात्यायनी
31 जनवरी – मां कालरात्रि
1 फरवरी – मां महागौरी
2 फरवरी – मां सिद्धिदात्री
3 फरवरी – नवरात्री पारण

तंत्र साधना के लिए होती है इन देविओं की पूजा
गुप्त नवरात्रि में कई साधक तंत्र साधना प्राप्त करने के लिए भी पूजा करते हैं. साधक गुप्त नवरात्रों के दौरान मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की आराधना कर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं. ऐसी मान्यता है कि गुप्त नवरात्रों के दौरान साधना पूरी से कई गुणा फल प्राप्त होता है.

SOURCE – NEWS18

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