मधेपुरा मेडिकल कालेज में संसाधनों का टोटा, गंभीर मरीजों को बिना इलाज कर दिया जाता है रेफर

खबरें बिहार की जानकारी

 अरबों की लागत से तैयार जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कालेज रेफरल हास्पिटल बना हुआ है। मेडिकल कालेज वाली एक भी सुविधा यहां के लोगों को नहीं मिल पा रही है। कहा तो यह जा रहा था कि इस मेडिकल कालेज के प्रारंभ होने के बाद कोसी, सीमांचल के मरीजों को मजबूरी में बाहर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन ऐसा न हो पाया। इलाज के लिए बाहर से मरीज आना तो दूर की बात रही।

यहां के स्थानीय मरीज को भी इलाज के लिए बाहर ही जाना पड़ता है। यहां सुपर स्पेशलिटी तो दूर की बात है। स्पेस्लिस्ट सुविधा भी नहीं मिल पाती है। कुल मिलाकर इलाज की जो सुविधा पहले से सदर व रेफरल हास्पिटल में मिलती है। वहीं सुविधा ही अभी भी मिल रही है। इमरजेंसी हो अथवा किसी गंभीर प्रकार के बीमारी की बात। मेडिकल कालेज जाने के बाद रटा रटाया सा जबाब मिलता है। उन्हें सीधे डीएमसीएच, पीएमसीएच आदि जगहों पर रेफर कर दिया जाता है।

केस स्टडी 1

रमेश खेतान को 27 फरवरी को लिवर संबंधित कुछ समस्या हुई। स्वजन उसे मेडिकल कालेज ले गए। लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें वहां से रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन पहले मधेपुरा के ही एक नर्सिंग होम में एवं बाद में पटना लेकर गए। लेकिन साधारण सी समस्या का भी मेडिकल कालेज में इलाज नहीं हो पाया।

 

 

केस स्टडी 2

सिंहेश्वर के मनोज मुखिया के पुत्र रूपेश कुमार का ट्रैन दुर्घटना में सर पर चोट लगी थी। परिजन उसे लेकर मेडिकल कालेज गए। वहां कुछ देर रहने के बाद उसे पटना रेफर कर दिया गया।

केस स्टडी 3

सिंहेश्वर के रोहित कुमार की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर 27 फरवरी को मेडिकल कालेज ले जाया गया। वहां से उसे रेफर कर दिया गया। जबकि उसके बाद मधेपुरा के ही एक छोटे से हास्पिटल में महिला का प्रसव कराया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published.