प्रकृति की गोद में बसा झारखंड का महान तीर्थ स्थल रजरप्पा एक जागृत सिद्धपीठ है। यह तंत्र साधना के लिए विख्यात है। यहां मां छिन्नमस्तिका (प्रचंड चंडिका) देवी की प्रतिमा प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को खींच लाती है और वात्सल्य रस का अमृत पान कराती है। यहां लोग देवी दर्शन, पूजा-अर्चना के लिए दूरदराज से आते हैं। मां छिन्नमस्ता देवी के प्रादुर्भाव के संबंध में कहा जाता है कि महाशक्ति की दस महाविद्याएं क्रमश: काली, तारा , षोड्शी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावति, बगलामुख, मांतंगी और कमला हैं।

क्या है दस महाविद्या का महत्व

महाभागवत में कथा आती है कि राजा दक्ष प्रजापति ने अपने यज्ञ में शिव को निमंत्रित नहीं किया। इसलिए अपमानित अनुभव कर शिव ने सती को यज्ञ में जाने से रोक दिया, लेकिन सती ने कहा कि मैं यज्ञ में अवश्य जाउंगी और वहां मैं अपने प्राणेश्वर के लिए यज्ञभाग प्राप्त करूंगी या यज्ञ को ही नष्ट कर दूंगी। यह कहते हुए सती के नेत्र लाल हो गए। देवी का रूप विकराल हो गया। इस भयानक रूप को देखकर शिव भाग चले। भागते हुए रूद्र को दसों दिशाओं में रोकने के लिए देवी ने अपनी अंगभूता दस देवियों को प्रकट किया। यही शक्तियां दस महाविद्याएं हैं। इनमें से पांचवी महाविद्या में मां छिन्नमस्तिका हैं।

मां छिन्नमस्तिका के वीडियो को 96 हजार हिट

बारहों महीने मां छिन्नमस्तिका के दरबार में श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है। देश से लेकर विदेशों तक में माता के भक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका के मंदिर से जुड़ा बनाया गया वीडियो वायरल हो रहा है। फरवरी में रजरप्पा नाम से बने फेसबुक पेज में अपलोड किए गए वीडियो को अब तक 96000 लोग देख चुके हैं। झारखंड सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के लिए बनाया गया वीडियो भी सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो रहा है। 5 मिनट 50 सेकेंड के इस वीडियो में मंदिर की महत्ता के साथ ही यहां की प्राकृतिक वादियों का बेहतर तरीके से दर्शाया गया है। मंदिर से जुड़ी मान्यताएं, श्रद्धालुओं की आस्था को दिखाते हुए बनाए गए इस वीडियो को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है।

वीडियो में विजुअल के माध्मय से मंदिर को दिखाने के साथ ही यहां होने वाले सांध्य आरती, भैरवी और दामोदर नदी का संगम, आसपास की अदभूत प्राकृतिक छंटा, रांची और रामगढ़ से मंदिर पहुंचने का मार्ग, दोनों जगह से यहां की दूरी आदि के बारे में बताया गया है। करीब छह हजार साल पुराने मंदिर की ख्याति तो शुरू ही चारों तरफ फैली है। मंदिर परिसर में मार्केटिंग कॉप्लेक्स, धर्मशाला, गेस्ट हाउस आदि का निर्माण हुआ है।

Sources:-Hindustan

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