बिहार में कोरोना के नाम पर अस्पतालों में लूट! प्राइवेट अस्पताल ने 3 दिन के इलाज का थमाया 2 लाख का बिल

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पटना: कोविड मरीजों के इलाज में लापरवाही की शिकायत मिलने पर सोमवार को डीआरडीए के निदेशक चंदन चौहान ने शहर के एक निजी अस्पताल में छापेमारी की। वहां एक महिला मरीज के तीन दिन के इलाज का दो लाख का बिल बनाया गया था। छापेमारी टीम से परिजनों ने इसकी शिकायत की। 

टीम ने जांच के दौरान पाया गया कि अस्पताल में कोविड मरीजों का दोहन किया जा रहा है। इलाज के नाम पर उनसे काफी अधिक राशि वसूली जा रही है। महिला मरीज की वहां इलाज के दौरान मौत भी हो गई। उसके गांव के सरपंच ईश्वर चंद्र दिवाकर ने इस मामले में बयान दिया है। इस अस्पताल में भर्ती एक अन्य मरीज से भी आईसीयू, एडमिशन व दवा के नाम पर भारी राशि ली गई थी। डीआरडीए निदेशक ने इस अस्पताल पर कार्रवाई की अनुशंसा जिलाधिकारी से की है।

बिना ऑक्सीजन किया रेफर, मरीज ने तोड़ा दम 
स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही ने सोमवार को साहेबगंज के एक कोरोना पीड़ित की जान ले ली। गंभीर स्थिति में मरीज को साहेबगंज पीएचसी से बिना ऑक्सीजन के लिए सरकारी एम्बुलेंस से एसकेएमसीएच रेफर कर दिया। इससे अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उसकी जान चली गई। इस गंभीर मामले में परिजन को मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद शव प्रबंधन की अनुमति करीब तीन घंटे बाद मिली, तब तक उसे इस काउंटर से उस काउंटर तक दौड़ाया जाता रहा। अंत में उपाधीक्षक डॉ. गोपाल शंकर सहनी के आदेश पर शव का प्रबंधन किया जा सका। 

मरीज के पुत्र ने बताया कि उसके पिता कोरोना से पीड़ित होकर साहेबगंज पीएचसी में भर्ती हुए। वहां उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती गई। स्थिति बिगड़ने के बाद पीएचसी से उन्हें एसकेएमसीएच रेफर किया गया। एसकेएमसीएच जिस सरकारी एम्बुलेंस से भेजा गया, उसमें ऑक्सीजन ही नहीं था। ड्राइवर ने रास्ते में बताया कि बिना ऑक्सीजन के ही वह एम्बुलेंस चला रहा है। इस बीच रास्ते में मरीज की स्थिति गंभीर होती चली गई व एसकेएमसीएच पहुंचते-पहुंचते उसकी जान भी चली गई। इसके बाद एसकेएमसीएच में सर्टिफिकेट लेने से लेकर शव के प्रबंधन की अनुमति लेने में तीन घंटे लग गए। कर्मचारी मृतक के पुत्र को काउंटर दर काउंटर भटकाते रहे, अंत में वह एसकेएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ. सहनी के पास पहुंचा तो शव प्रबंधन का आदेश जारी हुआ।

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