रहते हैं अमेरिका पर दिल है बिहारी, महीनों से कर रहे छठ पर्व की तैयारी,

आस्था

पटना: छठ महापर्व से जुड़ी श्रद्धा की डोर इतनी मजबूत है कि दुबई में रहने वाले लोग वहां रेगिस्तान में भी छठ पूजा करते हैं। गोपालगंज के शैलेष पांडेय पिछले पांच साल से दुबई में रह रहे हैं। शैलेष डॉट्सल इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन पीटीई लिमिटेड में मैनेजर हैं। लगभग 11 साल से विवाहित शैलेष पांडेय की पत्नी रानी इस बार अपना पहला छठ कर रही हैं।

सात समंदर पार से बिहार आते हैं फैमिली मेंबर्स… – छठ करने वाली व्रती रानी ने बताया कि शादी के शुरुआती वर्षों में अपने संयुक्त परिवार में छठ का पर्व देखती रही हूं। लेकिन इस बार संयोग ऐसा बना है कि यहां कोई नहीं है। – लेकिन जैसे-जैसे छठ नजदीक आ रहा है, लग रहा है हम घर पर ही हैं। वहीं दुबई में ही रह रहे बिहार के मुकेश की पत्नी ममता का भी इस बार पहला छठ है। – मुकेश ने बताया कि इससे पहले ममता कभी छठ में दुबई में नहीं रही है, लेकिन मैं रहा हूं। माहौल बिहार जैसा तो नहीं होता लेकिन यहां रहने वाले भारतीय लोगों के कारण इस पर्व को लेकर थोड़ी चहल-पहल रहती है। हालांकि छठ से जुड़ी सारी चीजें पहले से ही इंडिया से मंगानी पड़ी हैं।

डॉ. नीरज 12 साल से कर रहे छठ, अमेरिका से आते हैं भाई – डॉ.नीरज कुमार सिन्हा मां के साथ 12 साल छठ पूजा कर रहे हैं। पेशे से चिकित्सक और हॉर्ट हॉस्पिटल में आईसीयू के इंचार्ज डॉ. नीरज ने घर में छठ के प्रति आस्था देखकर छठ पूजा शुरू की। – उन्होंने बताया- इस बार बोस्टन (अमेरिका) से चचेरे भाई अमित अखौरी और आशीष अखौरी आ रहे हैं। कुछ लोग बेंगलुरू से आ रहे हैं। – रेडक्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. विनय बहादुर सिन्हा के बेटे हैं डॉ. नीरज सिन्हा। डॉ. नीरज का कहना है कि छत पर ही अस्थाई तालाब बनाया जाता है।

दुबई से पटना छठ पर्व करने आया फैमिली – छठ को मनाने के लिए कुछ लोग शहर से गांव जाते हैं। कुछ विदेश से अपने घर अाते हैं। ऐसे ही हैं दुबई में 10 सालों से काम करने वाले संजीव कुमार। – संजीव पटना के हैं और दुबई में शपुरजी पालंजी कंपनी में एचआर हैं। संजीव अपने पूरे परिवार के साथ मंगलवार को पटना आए हैं। – संजीव हर साल छठ करने पटना आते हैं। ऐसे तो संजीव पांच सालों से व्रत करते थे लेकिन अर्घ्य नहीं देते थे। वह पिछले तीन सालों से पूरी तरह छठ पर्व कर रहे हैं। – संजीव ने कहा कि अपने परिवार में अपने दादा और पापा को मैंने ये पर्व करते देखा है। इसलिए अपनी घर की परंपरा को कायम रखते हुए मैंने भी ये शुरू किया।

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