राजकीय सम्मान के साथ अटल पंचतत्व में विलीन,दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने उनको मुखाग्नि दी

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भारतीय राजनीति के युगपुरुष रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आज यहां पारंपरिक विधि विधान तथा मंत्रोच्चार और गगनभेदी नारों के बीच पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया जिसके साथ ही उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया।

राजधानी के शांतिवन के निकट राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर भारत रत्न श्री वाजपेयी की दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने उनको मुखाग्नि दी और विधि विधान ग्वालियर से विशेष रुप से बुलाए गए पंडितों ने कराया। शस्त्र दाग कर श्री वाजपेयी को सलामी दी गयी।

इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ और नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने श्री वाजपेयी के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किये।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने श्री वाजपेयी को श्रद्धासुमन अर्पित किये। इसके बाद पार्थिव शरीर से लिपटा हुआ तिरंगा श्री वाजपेयी की नातिन को सौंप दिया गया।

इस मौके पर राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद , भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी , समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत,अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल थे।

शव यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और कई केंद्रीय मंत्री तथा गणमान्य व्यक्ति कड़ी धूप और उमस भरे मौसम में भाजपा मुख्यालय, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग से लगभग सात किलोमीटर पैदल चलते हुए स्मृति स्थल पहुंचे। ये सभी वाहन के साथ साथ चल रहे थे। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री विजय , दिल्ली प्रदेश भाजपा के प्रमुख मनोज तिवारी और युवा सांसद अनुराग ठाकुर समेत कई अन्य नेता भी पैदल चल रहे थे। अंतिम संस्कार के समय स्मृति स्थल के आस पास जन समूह का सैलाब उमड़ पड़ा अौर वाजपेयी अमर रहे के नारों से आसमान गूंजने लगा। लाखों की तादाद में बच्चें, बूढे, स्त्रियां, युवक, किसान, कामगार तथा व्यापारी अपने प्रिय नेता की झलक देखने के लिए मौजूद थे। अंतिम यात्रा आईटीओ, दिल्ली गेट, दरियागंज होते हुए स्मृति स्थल पहुंची आैर रास्ते में दोनों ओर लाखों की संख्या में लोग खड़े थे और पुष्प वर्षा कर रहे थे तथा नारे लगा रहे थे।

 

अंतिम यात्रा के लिए पूरे रास्ते में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी। श्री मोदी के साथ एसपीजी के कमांडों पैदल चल रहे थे। श्री वाजपेयी के पार्थिव शरीर को फूलों से सजे एक वाहन पर रखा गया था और वाहन पर रंग बिरंगी बड़ी छतरियां लगाई गयी थी।

इस मौके पर तीनों थल सेना, वायु सेना आैर नौसेना सेना के दस्ते मौजूद थे। थलसेना की मराठा, सिख और गोरखा रजिमेंट के जवान भी उपस्थित थे। रक्षा मंत्री निर्मला सीमारमण और कई केंद्रीय मंत्री तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता व्यक्तिगत रुप से पहले से ही स्मृति स्थल पर मौजूद थे और निगरानी कर रहे थे।

श्री वाजपेयी के अंतिम संस्कार के समय उनके परिवार के लोगों भी उपस्थित थे। भूटान के नरेश जिग्मे वांगचुक, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, श्रीलंका के कार्यवाहक विदेशमंत्री लक्ष्मण किरेला, बंगलादेश के विदेश मंत्री , नेपाल के विदेश, आैर पाकिस्तान के कानून मंत्री अली जफर मंत्री भी इस मौके पर मौजूद रहे।

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