अटल जी की अस्थियां गंगा में प्रवाहित तो राष्ट्र संत रूपमुनि महाराज का जैतारण में अंतिम संस्कार

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इसे एक संयोग ही कहा जाएगा कि 19 अगस्त का जब राजनीति के शिखर पुरुष रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों को हरिद्वार में गंगा नदी में प्रवाहित किया जा रहा था कि तभी राष्ट्र संत रूपमुनि महाराज की अंतिम यात्रा राजस्थान के जैतारण में निकल रही थी।

चाहे उत्तराखंड का हरिद्वार हो या रेगीस्तान का जैतारण। दोनों ही स्थानों पर उमस और भीषण गर्मी का माहौल था, लेकिन मौसम का असर न हरिद्वार में और न जैतारण में देखा गया। दोनों ही स्थानों पर चाहने वालों की जबरदस्त भीड़ थी। हालांकि हरिद्वार में भाजपा के राष्ट्र अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेन्द्र रावत आदि की वजह से कुछ सरकारी माहौल था, लेकिन जैतारण में तो रूपमुनि महाराज के अनुयायी का ही जमावड़ा रहा।

अपने गुरु के अंतिम दर्शन करने के लिए देशभर से अनुयायी जैतारण पहुंचे। सब जानते हैं कि जैन मुनि ने भगवान महावीर के सिद्धांतों और शिक्षाओं के प्रचार प्रसार में कोई कसर नहीं छोड़ी। राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश में रूपमुनि की एक अलग पहचान थी। गौमाता के प्रति उनका विशेष लगाव रहा, इसलिए राजस्थान के कई क्षेत्रों में बड़ी बड़ी गौशालाओं का आरंभ करवाया।

इसी प्रकार समाज की स्थिति को देखते हुए उन्होंने वृद्धाश्रमों की शुरुआत करवाई। इसे रूपमुनि का चमत्कार ही कहा जाएगा कि उनके कहने मात्र से करोड़ों रुपए की राशि एकत्रित हो जाती थी। रूपमुनि ने विभिन्न धर्मों के धमाचार्यों को भी एक मंच पर लाने के कई बार प्रयास किए, उनका मानना रहा कि समाज में धर्म गुरुओं के जरिए ही समरसता लाई जा सकती है। जो काम धर्मगुरु कर सकते हैं वो काम सरकार नहीं कर सकती। राजस्थान के कई शहरों में जैन स्थल बनवाने में रूपमुनि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

अजमेर के बीके कौल नगर स्थित जैन समाज की भूमि पर भी रूपमुनि एक भव्य स्थानक का निर्माण करवाना चाहते थे, लेकिन समाज के ही कुछ लोगों के आपसी विवाद की वजह से सफलता नहीं मिली। रूपमुनि ने जो सामाजिक कार्य किए उन्हें देशभर के लोग हमेशा याद करेंगे। 19 अगस्त को देशभर के अनुयायी जैतारण में जुटे और भव्य अंतिम यात्रा के बाद उत्साह और श्रद्धा के साथ अंतिम संस्कार भी किया गया। रूपमुनि इन दिनों जैतारण में ही चातुर्मास कर रहे थे और तभी 18 अगस्त को महाप्रयाण हो गया।

अस्थियां हरि के द्वार

मान्यता है कि हरिद्वार हरि के द्वार यानि भगवान के पास जाने के लिए द्वार है। इसी मान्यता के चलते 19 अगस्त को पूर्व पीएम वाजपेयी की अस्थियां हरिद्वार में गंगा नदी में प्रवाहित की गई। यह भी मान्यता है कि अस्थियों का विसर्जन बहती नदी में ही होता है। इन्हीं सभी मान्यताओं के चलते हुए ही वाजपेयी की अस्थियों का विसर्जन हुआ।

अस्थियों को पहले भल्ला काॅलेज के ग्राउंड में रखा और फिर एक वाहन में अस्थी कलश के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के सीएम त्रिवेन्द्र रावत आदि वाहन में सवार हुए और कोई दो किलोमीटर लम्बे मार्ग से गुजर कर गंगा नदी के किनारे हर की पौड़ी पर पहुंचे। इस लम्बे मार्ग में लाखों लोगों ने अस्थी कलश के दर्शन किए। नदी के किनारे वाजपेयी की दत्तक पुत्री नमिता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य ने अस्थियों को वैदिक मंत्रांे के बीच विसर्जित किया।

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