सावन मास का आज अंतिम मंगला गौरी व्रत है, इस दिन माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही साथ भगवान शिव की भी पूजा का विशेष लाभ प्राप्त होता है। माता मंगला गौरी अपने भक्तों को अखंड सौभाग्य और मनोवांछित वर प्राप्ति का वरदान देती हैं।

माता मंगला गौरी को पूजा के दौरान सुहाग की सामग्री अर्पित करनी चाहिए। इससे भक्तों के पति को लंबी उम्र तथा संतान को सुखी जीवन प्राप्त होता है।

इस बार सावन में चार सोमवार और चार मंगलवार पड़े। सावन के सोमवार को भगवान शिव और मंगलवार के दिन माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा होती है।

पूजा विधि

स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद पूजा घर में मंगला गौरी यानी पार्वती जी की तस्वीर को साफ कर लें। फिर उसे चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर स्थापित कर दें। फिर माता का षोडशोपचार पूजन करें और उनको सुहाग की सामग्री 16 की संख्या में चढ़ाएं। फल, फूल, माला, मिठाई आदी भी 16 की संख्या में अर्पित करें।

इसके साथ ही भगवान शिव का भी विधि विधान से आराधना करें। उनको बेल पत्र, भांग, मदार का फूल, धतूरा, गाय का दूध, गंगा जल आदि अर्पित करना न भूलें।

व्रत का महत्व

मंगला गौरी व्रत करने से वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर होती हैं। यह व्रत खासतौर पर महिलाओं के लिए होता है। लेकिन दाम्पत्य जीवन के दोषों को दूर करने के लिए पुरुष भी यह व्रत कर सकते हैं।

Sources:-Dainik Jagran

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