लालू को हैं ये 15 बीमारियां, 70 वर्ष की उम्र में रोज खानी पड़ती हैं दर्जनों दवाइयां

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव इन दिनों रांची के राजेन्द्र इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) के कॉर्डियोलॉजी विभाग में भर्ती हैं। मंगलवार को ही उन्हें नई दिल्ली स्थित एम्स से लाकर यहां शिफ्ट किया गया है। तब एम्स ने डिस्चार्ज रिपोर्ट में कहा था कि लालू यादव की तबीयत अब ठीक है मगर रांची आते ही उनकी परेशानी बढ़ गई है।

रिम्स में उनका इलाज कर रहे डॉ. उमेश प्रसाद के मुताबिक लालू यादव को फिलहाल 15 तरह की बीमारियां हैं, जिसके लिए उन्हें 19 दवाइयां दी जा रही हैं। बतौर डॉक्टर लालू को हार्ट, किडनी, डायबिटीज के अलावा प्रोस्टेट, स्मॉल हार्मिया, आंखों की परेशानी, लो बैक डिफ्यूज डिस्क की भी परेशानी है।

 

रिम्स के डॉक्टरों ने लालू को दिए जा रहे इन्सूलिन का इंजेक्शन बदल दिया है।

पहले उन्हें जेनरिक दवा दी जा रही थी लेकिन अब उन्हें ब्रांडेड दवा दी जा रही है। एम्स के डॉक्टरों ने रिम्स को सलाह दी है कि लालू यादव का रोजाना ब्लड शूगर और ब्लड प्रेशर मापा जाए और उसका चार्ट बनाया जाए। सप्ताह में दो बार हिमोग्लोबीन और महीने में एक बार रीनल फंक्शन और लीवर फंक्शन टेस्ट कराने की भी सलाह दी है। रिम्स में पांच डॉक्टरों की टीम लालू का इलाज कर रही है। इसमें मेडिसिन, सर्जरी, न्यूरो, कार्डियोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर शामिल हैं।


इस बीच रिम्स में लालू यादव चौबीसो घंटे कड़ी सुरक्षा में हैं। उनकी सुरक्षा में रैपिड एक्शन पुलिस, क्विक एक्शन पुलिस के जवानों, रांची पुलिस के दारोगा, जमादार समेत कुल 15 लोगों को डीएसपी के नेतृत्व में तैनात किया गया है। एक मजिस्ट्रेट की भी तैनाती वहां की गई है और हर आने-जाने वाले शख्स पर नजर रखी जा रही है।

उधर, राजद सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री जय प्रकाश नारायण यादव ने बीजेपी की केंद्र सरकार और सीबीआई पर साजिश के तहत काम करने और लालू यादव से जीने का अधिकार छीनने का आरोप लगाया है। बता दें कि लालू यादव ने लिखित तौर पर एम्स निदेशक से गुहार लगाई थी कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए एम्स से रिम्स शिफ्ट नहीं कराया जाय।

लालू को हैं ये साड़ी बीमारियां

70 साल के लालू यादव को टाइप टू डायबिटीज, हाइपरटेंशन, पेरिएनल एब्सेस, किडनी इंज्यूरी एंड क्रोनिक किडनी डिजीज, पोस्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट, प्रोस्थेटिक हाइपर प्लेसिया, सेकेंड्री डिप्रेशन, लो बैक डिफ्यूज डिस्क, लेफ्ट आई इमैच्योर कैटरेक्ट, राइट लोवर पोल रेनल, प्राइमरी ओपन एंगल ग्लूकोमा, हाइट्रोजेनस थैलेसिमिया, विटामिन डी डिफिशिएंसी समेत ग्रेड वन फैटी लीवर की बीमारियां हैं।

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