लक्ष्मण झूला बंद होने के बाद अब कांवड़ियों के लिए रामझूला होते हुए नीलकंठ पहुंचने का रास्ता तय किया गया है। इस पुल से प्रवेश करने के बाद कांवड़िए मौनी बाबा से गुजरते हुए नीलकंठ पहुंचेंगे। यह रूट रविवार को आईजी अजय रौतेला की समीक्षा बैठक में तय किया गया।

आईजी ने जब झूला पुल की जानकारी मांगी तो पता चला कि लक्ष्मण झूला में दोपहिया वाहनों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। जबकि पैदल लोग आ जा रहे हैं। इस पर आईजी ने नाराजगी जताई । उन्होंने कहा कि जब प्रशासन की तरफ से आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए कहा गया था तो किसके निर्देश पर लोगों को आने दिया जा रहा है।उन्होंने गुस्से से कहा कि क्या दोपहिया वाहनों को रोकने भर, से हा’दसा टल जाएगा। पैदल यात्रियों को जानबूझकर ख’तरे में क्यों डाला जा रहा है।

आईजी ने पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिया कि लक्ष्मण झूले पर लोगों को आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। जिसके बाद तय किया गया कि श्रद्धालु मौनी बाबा से होते हुए बैराज मार्ग से वापसी करेंगे। वहीं, चौपहिया वाहन बैराज मार्ग से प्रवेश कर मौनी बाबा और गरूड़चट्टी होते हुए नीलकंठ पहुंचेंगे। वाहनों का वापस लौटने का रास्ता गरूड़चट्टी पुल से तपोवन और मुनिकीरेती बाईपास मार्ग होगा।

साल 1930 में गंगा नदी के ऊपर लक्ष्मण झूले का निर्माण किया गया था। इस पुल का इस्तेमाल ऋषिकेश में लोग नदीं के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए करते हैं। अब काफी समय के बाद इस पुल को बंद किया गया है। प्रशासन के आदेश से पहले जांच एजेंसियों ने चेताया था कि लक्ष्मण झूले पर लोगों का बोझ बढ़ रहा है जिससे पुल कभी भी गिर सकता है। चेतावनी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन ने अस्थाई तौर पर आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

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