गया के बंग्ला स्थान मोहल्ले के कुंदन आगामी 7 जुलाई को साउथ अफ्रीका में ताइक्वांडो विश्व चैंपियनशिप में भाग लेने जा रहे हैं। कुंदन बताते हैं कि मेरे पिता गया कॉटन मिल में काम करते थे, मिल कई वर्ष पहले बंद हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने पर कुंदन गया के कोचिंग संस्थान के बाहर साइकिल स्टैंड में काम करने लगा। वह छात्रों के साइकिल को स्टैंड में लगाता था, जिसके एवज में उसे 3000 रुपया महीना मिलता था। उसी से परिवार का गुजारा करने लगा, लेकिन आत्मविश्वास और हिम्मत न हारी।

कुंदन को जुड़ो कराटे के प्रति बचपन से ही जुनून था। पहली बार 2013 में बड़ी मुश्किल से राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में शामिल होने का मौका मिला पर इसमें हार मिली। कुंदन ने 2017 में मलेशिया में इंटरनेशनल नीलो कराटे चैम्पियनशिप में शामिल होकर भारत के कांस्य पदक जीता। उसी वर्ष नेपाल में भी मिक्स मार्शल आर्ट्स के विश्व चैंपियनशिप टायसन ब्राइसन के हाथों पदक जीता।

विश्व चैंपियन बनने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे कुंदन ने बताया कि प्रतिदिन 6 घंटा अभ्यास कर रहा हूं। विश्वास ही कि पदक जीत लूंगा। अगला लक्ष्य 2020 में आयोजित ओलंपिक क्वालीफाई करना है। कुंदन ने कहा कि साउथ अफ्रीका जाना है टिकट भी हो गयी है बाकी के पैसे के जुगाड़ में लगा हूं।

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