कुढ़नी में गोपालगंज दोहराने से कतरा गए मतदाता, राजद-जदयू का साथ भी नहीं आया रास

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कुढ़नी में पहले से ही आमने-सामने की लड़ाई थी, जो अंत तक वैसी ही रही। मतगणना के परिणाम से स्पष्ट हो गया कि वोटों को बांटने या तीसरा-चौथा कोण बनाने का प्रयास करने वाले दलों की दाल नहीं गली। गोपालगंज में ऐसे दो दल (एआइएमआइएम और बसपा) 20 हजार से अधिक वोट झटक ले गए थे। तब वे वोट महागठबंधन के बताए गए थे। इसी आधार पर वहां भाजपा की जीत हुई थी। कुढ़नी में ऐसे ही व्यग्र रहे दो दलों (एआइएमआइएम और वीआइपी) को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इससे स्पष्ट हो गया कि व्यर्थ बांटने की अपेक्षा अपने वोट को जीत-हार के लिए निर्णायक बनाने में मतदाताओं की ज्यादा रुचि रही।

AIMIM ने जदयू तो VIP ने दोनों गठबंधनों के वोट बैंक में सेंध लगाई

बोचहां की तुलना में कुढ़नी में वीआइपी पार्टी और मुकेश सहनी को जनता ने ज्यादा झटका दिया है। भूमिहार प्रत्याशी और मल्लाह नेता होने के बावजूद में महज दस हजार वोट के अंदर वीआइपी पार्टी सिमट गई। बोचहां के परिणाम से सबक लेते हुए मतदाताओं ने एकतरफा वोटिंग की। या तो पक्ष में या विपक्ष में। परिणाम अब सामने है। वीआइपी को महज 9988 मत मिले, जबकि एआइएमआइएम प्रत्याशी महज 3202 वोट पर सिमट गए।

जानकारों का कहना है कि एआइएमआइएम प्रत्याशी ने जदयू के वोट काटे तो वीआइपी ने दोधारी तलवार की तरह दोनों गठबंधनों के वोट बैंक में सेंध लगाई। राजद कैडर के बागी दो मल्लाह निर्दलीय शेखर सहनी का 3716 वोट और दूसरे निर्दलीय संजय कुमार 4250 वोट कटना भी जदयू को भारी पर गया। गोपालगंज में बसपा की इंदिरा यादव को 8853 और एआइएमआइएम के अब्दुल सलाम को 12,212 वोट मिले थे। ये दोनों राजद के आधार वोट थे।

मतदाताओं को नहीं भाया राजद-जदयू का साथ

एक से एक मिलने पर 11 होते हैं, मगर कभी-कभी यह समीकरण गड़बड़ा भी जाता। कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र में कुछ ऐसा ही होता है। यहां राजद और जदयू का साथ मतदाताओं को नहीं भाता। जदयू का साथ लिए बिना राजद यहां से जीत जाता है। वहीं, राजद का साथ मिलने के बाद भी जदयू यहां से सफल नहीं हो पा रहा है। पहले बात विधानसभा चुनाव 2015 की। चुनाव में जदयू-राजद-कांग्रेस का मजबूत समीकरण था। ऊपर से आरक्षण की समीक्षा किए जाने के आरएसएस प्रमुख के बयान की चर्चा पूरे चुनाव में रही। इसके बाद उक्त गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार मनोज कुशवाहा यहां से जीत दर्ज नहीं कर सके। उन्हें भाजपा के केदार प्रसाद गुप्ता ने 11,570 वोटों के बड़े अंतर से मात दी थी। केदार को 73,227 तो मनोज कुशवाहा को 61,657 वोट मिले थे।

दो फाड़ हुआ फ्रंट

कुढ़नी चुनाव में पूर्व नगर विकास मंत्री और भूमिहार ब्राह्मण सामजिक फ्रंट के अध्यक्ष सुरेश शर्मा के भाजपा प्रत्याशी के लिए प्रतिबद्ध होने की वजह से यह संगठन दो फाड़ हो गया। सुरेश शर्मा की सक्रियता का फायदा भी केदार गुप्ता को मिला। वहीं, वीआइपी प्रत्याशी नीलाभ के पक्ष में खुल कर उतरने के बाद भी फ्रंट के दो कार्यकारी अध्यक्ष सुधीर शर्मा और पूर्व मंत्री अजीत कुमार भूमिहार मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर पाए।

कुढ़नी क्षेत्र में लगाए गए भाजपा के प्रमुख कार्यकर्ता, पन्ना प्रमुख और विस्तारकों ने पहले ही यह दावा कर दिया था। चुनाव परिणाम ने इसे साबित कर दिया। भाजपा में संगठन खासकर चुनाव के दौरान जमीनी स्तर काम करने वाले एक विस्तारक ने बताया कि जाति और समुदाय के खांचे में बंटने के बजाए अपनी वैचारिक समर्पण, विकास और राष्ट्रहित सर्वोपरि के सिद्धांत पर अडिग रहे। अहम यह रहा कि कुढ़नी में भाजपा द्वारा सुरेश शर्मा को भी तवज्जो दिया जाना पार्टी हित में रहा।

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