कृषि कानून वापस लेने पर सीएम नीतीश की आई प्रतिक्रिया, जानिए क्या कहा

राजनीति

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून बनाया था। यह केंद्र सरकार का निर्णय था। प्रधानमंत्री जी ने शुक्रवार को खुद घोषित कर दिया कि वे इसको वापस ले लेंगे। अगले इसी सत्र में ही। इस बारे में बहुत स्पष्टता के साथ उन्होंने अपनी बातें रख दी हैं। कहा है कि हमने किसानों के हित में काम किया, पर लोगों को हम समझा नहीं पाये। इस कारण इनको वापस ले रहे हैं।

सीएम ने मीडिया से कहा कि सारी बातें हो गईं, इसलिए इसमें कोई खास बोलने का औचित्य नहीं है। जिसको निर्णय लेने का अधिकार है, उन्होंने पहले लिया और बाद में उनको लगा कि इसको वापस करेंगे। फिर इसका निर्णय लिया। इसमें सब बातें स्पष्ट है। बाकी विपक्ष और जिनको बोलने का मन है, वे कुछ बोलते रहेंगे।

 

बता दें कि शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले करीब एक वर्ष से अधिक समय से विवादों में घिरे तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा की और इसके लिए संसद के आगामी सत्र में विधेयक लाया जाएगा। तीनों कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन कर रहे थे। प्रधानमंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से जुड़े मुद्दों पर एक समिति बनाने की भी घोषणा की।  प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को गुरु नानक जयंती के अवसर पर राष्ट्र के नाम संबोधन में इस आशय की घोषणा की। उन्होंने कहा कि  पांच दशक के अपने सार्वजनिक जीवन में मैंने किसानों की मुश्किलों, चुनौतियों को बहुत करीब से अनुभव किया है।

वहीं दूसरी ओर राजद सुप्रीमो लालू यादव ने ट्वीट कर कहा है कि विश्व के सबसे लंबे,शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक किसान सत्याग्रह के सफल होने पर बधाई। पूँजीपरस्त सरकार व उसके मंत्रियों ने किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी, आढ़तिए, मुट्ठीभर लोग, देशद्रोही इत्यादि कहकर देश की एकता और सौहार्द को खंड-खंड कर बहुसंख्यक श्रमशील आबादी में एक अविश्वास पैदा किया। देश संयम, शालीनता और सहिष्णुता के साथ-साथ विवेकपूर्ण, लोकतांत्रिक और समावेशी निर्णयों से चलता है ना कि पहलवानी से! बहुमत में अहंकार नहीं बल्कि विनम्रता होनी चाहिए।

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