जाने क्यों लगाया जाता भगवान् श्रीकृष्ण को 56 भोग, जन्माष्टमी पर राशि के अनुसार लगाएं कान्हा को भोग

आस्था

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को हर साल भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस साल कृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी तिथि को रोहिणी नक्षत्र और वृष लग्न में हुआ था।

यह पर्व देशभर में मनाया जाता है। वहीं मथुरा-वृंदावन में इस त्योहार की अलग ही धूम होती है। खासकर मंदिरों और घरों में लोग बाल गोपाल के जन्मोत्सव का आयोजन करते हैं। बाल गोपाल के लिए पालकी सजाई जाती है। उनका शृंगार किया जाता है।

इस दिन नि:संतान दंपत्ति विशेष तौर पर जन्माष्टी का व्रत रखते हैं। वे बाल गोपाल कृष्ण जैसी संतान की कामना से यह व्रत रखते हैं और मुरलीवाले को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाते हैं। ज्योतिषीय मान्यता है कि इस दिन राशि के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को शृंगार और भोग लगाने से जातकों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

भगवान श्री कृष्ण को 56 भोग लगाने की परंपरा है.

कहा जाता है की भगवान श्री कृष्ण की माता यशोदा उनके लिए आठ पहर यानि दिन में आठ बार खाना बनाकर अपने हाथों से खिलाती थीं. एक बार ब्रजवासियों ने इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के पकवान बनाएं. ये देखकर श्री कृष्ण ने नंदलाल से पूछा कि ये सब किस के लिए किया जा रहा है, तो उन्होंने बताया कि ये इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए किया है, ताकि वो खुश होकर अच्छी बारिश करें और अच्छी फसल हो. लेकिन श्री कृष्ण को ये बात कुछ समझ नहीं आई और उन्होंने कहा कि इंद्र देव का काम ही बारिश करना है तो उनकी पूजा क्यों करनी. बल्कि अगर पूजा करनी है तो गोवर्धन पर्वत की करें. क्योंकि इससे फल-सब्जियां मिलती हैं और पशुओं को चारा मिलता है. ब्रजवासियों को श्री कृष्ण की बात सही लगी. और उन्होंने गोवर्धन की पूजा शुरू कर दी.

ब्रजवासियों को ऐसा करता देखकर इंद्र को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने गुस्से में तेज बारिश कर दी. सब जगह पानी-पानी हो गया. ऐसे में गांव वालों को इस कहर से बचाने के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक उंगली से उठा लिया और पूरे ब्रज की रक्षा की. भगवान श्री कृष्ण ने सात दिन तक अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर रखा और सात दिन तक कुछ नहीं खाया. आंठवे दिन बारिश रुकने पर उन्होंने ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत से बाहर निकाला.

सात दिन तक खाना न खाने के कारण माता यशोदा और अन्य ब्रजवासियों ने मिलकर भगवान श्री कृष्ण के लिए व्यंजन का प्रबंध किया. क्योंकि यशोदा माता श्री कृष्ण को एक दिन में आठ बार खाना खिलाती थी, इसलिए 7 दिन तक कुछ न खाने पर उन्हें 56 भोग का भोग लगाया गया , जिसमें वे सभी चीजें शामिल की गईं जो श्री कृष्ण को पसंद थी.

क्या है 56 भोग?

श्री कृष्ण को भोग लगाने के लिए 56 भोग बनाने की परंपरा है. इसमें 20 तरह की मिठाई, 16 तरह की नमकीन और 20 तरीके के मेवे और मिष्ठान आदि का भोग लगाते हैं. इसमें माखन-मिश्री, खीर, लड्डू, बादाम का दूध, रसगुल्ला, मठरी, रबड़ी, जलेबी, टिक्की, मालपुआ, मूंग की दाल का हलवा, दही, खिचड़ी, दाल, चावल, कढ़ी, घेवर, इलायची, चिला, लौकी की सब्जी, बैंगन की सब्जी, मुकब्बा आदि सभी चीजें 56 भोग का हिस्सा होती हैं. इसके अलावा पापड़, चटनी, मोहनभोग, साग और पकौड़ी भी 56 भोग में रखी जाती हैं.

अगर आप किसी कारणवश छप्पन भोग नहीं बना सकते तो इस बार जन्माष्टमी पर आप अपनी राशि के अनुसार इस प्रकार भगवान् को भोग लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

मेष राशि
इस राशि के जातकों को भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार लाल रंग के कपड़े से करने के बाद उन्हें माखन मिश्री का भोग लगाना चाहिए।

वृषभ राशि 
जन्माष्टमी के दिन वृषभ राशि के जातकों को मुरलीवाले को माखन का भोग लगाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि ये सब करने से भगवान उनकी सारी परेशानियों को दूर कर देंगे।

मिथुन राशि 
मिथुन राशि के जातकों को जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण भगवान का चंदन से तिलक करना और उसके बाद उन्हें भोग में दही अर्पण करना चाहिए। फिर भगवान के सामने हाथ जोड़कर अपनी अर्जी लगाएं।

कर्क राशि 
इस राशि के जातकों को भगवान श्रीकृष्ण का सफेद वस्त्र से श्रृंगार करना चाहिए और फिर उन्हें दूध और केसर का भोग लगाना चाहिए।

सिंह राशि 
जन्माष्टमी के दिन सिंह राशि के लोगों को कान्हा जी का श्रृंगार गुलाबी रंग के कपड़ों से करना चाहिए। इसके बाद अष्टगंध का तिलक लगाना चाहिए। प्रसाद में उन्हें माखन-मिश्री चढ़ाएं।

कन्या राशि
कन्या राशि के जातकों को जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को हरे रंग के वस्त्रों से सजाएं। इसके बाद उन्हें मावे का भोग जरूर लगाएं।

तुला राशि
तुला राशि के जातकों के जातकों को जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को गुलाबी रंग के वस्त्र पहनाएं और इसके बाद उन्हें घी का भोग लगाएं।

वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातकों को भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर लाल वस्त्र पहनाएं और साथ ही उन्हें माखन या दही जरूर चढ़ाएं।

धनु राशि
धनु राशि के जातकों को जन्माष्टमी पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण को पीले वस्त्र पहनाने चाहिए। इसके बाद भगवान को प्रसाद भी पीले रंग से बनी मिठाई जरूर चढ़ाएं।

मकर राशि
मकर राशि के जातकों को कान्हा जी को नीले वस्त्रों से श्रृंगार करना चाहिए और पूजा में उन्हें मिश्री का भोग लगाना चाहिए।

कुंभ राशि
कुभ राशि के जातक जन्माष्टमी पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण को नीले रंग का वस्त्र पहनाएं। फिर कान्हा को बालूशाही का भोग लगाएं।

मीन राशि
जन्माष्टमी पर मीन राशि के जातकों को भगवान श्रीकृष्ण को पीतांबरी वस्त्र और पीले ही रंग के कुंडल पहनाएं। फिर भोग में केसर और बर्फी चढ़ाएं।

 

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