बिहार की ‘कोसी नदी’ , जिसने वर्ष 2008 में बिहार में प्रलय की स्थिति देखी थी. सात जिलों के पांच सौ लोगों की जान जब बिहार में गई, तब कोसी नदी बिहार के लिए काल बन गई. कहते हैं उस भीषण बाढ़ ने लगभग बिहार के तीन करोड़ लोगों को मौत बेहद नजदीक से दिखाई थी. गांव के गांव डूबे..भूख प्यास से लोगों की , पशुओं जान जा रही थी. और फिर कोसी को ‘बिहार का दुख’ के नाम से जाना जाने लगा.

हर साल बाढ़ आती है , कई जिंदगियां तबाह होती हैं. पानी के तेज उफ्फानों के साथ कोसी क्षेत्र में मीडिया भी अलर्ट होती है. और जैसे-जैसे पानी उतरता है, कोसी बस चर्चा में सीमित रह जाती है.

जरूरत है कि कोसी क्षेत्र पर बुद्धिजीवी और आम लोग चर्चा करें, हर साल की तबाही का निष्कर्ष निकाले. इसी संदर्भ में कोसी में आने वाले 2,3 जून को ‘कोशी शिखर सम्मेलन’ कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है. जहां कोसी के हालात पर चर्चा की जाएगी. कार्यक्रम में प्रो. दिनेश मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार पुष्यमित्र, रंजीत कुमार , आरटीआई कार्यकर्ता व कोसी के समाधान के लिए संघर्षरत महेंद्र यादव, ब्रह्मदेव चौधरी, रामदेव शर्मा उपस्थित रहेंगे. आप भी जुड़िए कार्यक्रम से. कार्यक्रम से जुड़ने के लिए आप इस लिंक पर जाकर पंजीकरण करवा सकते हैं. साथ कोशी शिखर सम्मेलन के पेज को लाइक और शेयर करें. आइए चर्चा करें, निदान निकाले और बिहार बदले.

https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLScyNpp-cZPNoFx8havmlHlWlK1-RH_0JEIPGbRh-06tyFVhyw/viewform

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here