भगवान शनिदेव का दिन हैं शनिवार, इस दिन शनिदेव की पूजा का विधान हैं। शनि देव को न्‍याय का देवता माना जाता है। बहुत से लोग उनसे डरते हैं मगर वह ऐसे देवता हैं जो सभी के कर्मों का फल देते हैं। उनसे कोई भी बुरा काम नहीं छुपा है। शास्‍त्रों के मुताबिक शनिदेव सूर्य देव और देवी छाया के पुत्र हैं। इनका जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या हुआ था। शुद्ध मन से प्रत्‍येक शनिवार को व्रत रखने से शनि अत्‍यंत प्रसन्‍न होते हैं। ऐसा करने वालों पर उनकी कुपित दृष्‍टि नहीं पड़ती। कुंडली में यदि शनि अशुभ हो तो व्यक्ति को किसी भी काम में आसानी से सफलता नहीं मिल पाती है। कब शनि देव की शरण में जाना चाहिए और कैसे उनकी पूजा करनी चाहिए…

पूजा विधि 

-शुद्ध स्नान करके पुरुष पूजा कर सकते हैं।

– महिला शनि चबूतरे पर नहीं जाएं। मंदिर हो तो स्पर्श न करें।

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-अगर आपकी राशि में शनि आ रहा है तो शनि को अवश्य पूजें।

– अगर आप साढ़ेसाती से ग्रस्त हो तो शनिदेव का पूजन करें।

-यदि आपकी राशि का अढैया चल रहा हो तो भी शनि देव की आराधना करें।

– यदि आप शनि दृष्टि से त्रस्त एवं पीड़ित हो तो शनिदेव की अर्चना करें।

-यदि आप कारखाना, लोहे से संबद्ध उद्योग, ट्रेवल, ट्रक, ट्रांसपोर्ट, तेल, पे‍ट्रोलियम, मेडिकल, प्रेस, कोर्ट-कचहरी से संबंधित हो तो आपको शनिदेव मनाना चाहिए।

-यदि आप कोई भी अच्‍छा कार्य करते हो तो शनि देव की कृपा के लिए प्रार्थना करें।

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-यदि आपका पेशा वाणिज्य, कारोबार है और उसमें क्षति, घाटा, परेशानियां आ रही हों तो शनि की पूजा करें।

-अगर आप असाध्य रोग कैंसर, एड्स, कुष्ठरोग, किडनी, लकवा, साइटिका, हृदयरोग, मधुमेह, खाज-खुजली जैसे त्वचा रोग से त्रस्त तथा पीड़ित हो तो आप श्री शनिदेव का पूजन-अभिषेक अवश्य कीजिए।

– सिर से टोपी आदि निकालकर ही दर्शन करें।

-जिस भक्त के घर में प्रसूति सूतक या रजोदर्शन हो, वह दर्शन नहीं करता।

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