घूमने-फिरने के लिहाज से मशहूर है पटना की ये जगहें, हर साल लगता है पर्यटकों का तांता

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बिहार की राजधानी पटना का प्राचीन नाम पाटलीपुत्र है। गंगा नदी के तट पर स्थित पटना देश के सबसे पुराने शहरों में से एक है। 5 वीं शताब्दी ईसा पूर्व में  पाटलिपुत्र की स्थापना मगध के राजा अजातशत्रु ने की थी। पटना शहर की सुंदरता इसकी चौड़ी सड़कों, इमारतों और टेढ़े-मेढ़े चौराहों से है। शहर की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत पटना शहर के आकर्षण में और बढोतरी करती है। हम आपको पटना शहर के उन दर्शनीय स्थलों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां आपको पटना आने के बाद जरूर जाना चाहिए।

पटना संग्रहालय

मुगल और राजपूत वास्तुकला शैली में निर्मित पटना संग्रहालय में हिंदू और बौद्ध कलाकारों द्वारा सिक्कों, चित्र, उपकरण, कांस्य की मूर्तियां जैसे पुरातात्विक कलाकृतियों को प्रदर्शित करता है। संग्रहालय का एक और बेशकीमती संग्रह ब्रिटिश काल की तस्वीरों का उल्लेखनीय संग्रह है।

तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब

हरमंदिर तख्त श्री पटना साहिब सिखों के सबसे पवित्र तीर्थों में से एक है, जिसे पटना साहिब गुरुद्वारा के नाम से जाना जाता है। गंगा के तट पर स्थित यह गुरुद्वारा देश भर से हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। गुरुद्वारे की संगमरमर की संरचना सिख वास्तुकला की भव्यता में चार चांद लगाती है। इसे पूर्वी भारत में सिख धर्म के केंद्र के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा यह पटना में घूमने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है।

संजय गांधी जैविक उद्यान

संजय गांधी जैविक उद्यान भारत के 16 सबसे बड़े जैविक उद्यानों में से एक है जिसे 1973 में एक छोटे से उद्यान के रूप में स्थापित किया गया था। यह पार्क संजय गांधी बॉटनिकल एंड जूलॉजिकल गार्डन या पटना चिड़ियाघर के रूप में जाना जाता है।  618966.69 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैले इस चिड़ियाघर में लगभग 110 प्रजातियों के 800 जानवर हैं। जानवरों को उनकी प्रकृति के अनुसार अलग-अलग कमरों में रखा जाता है, जैसे कि साप घर, मछली घर आदि। पर्यटकों को बाघ, तेंदुआ, सियार, काला हिरण, हाथी, हिमालयी काले भालू, जेब्रा और जिराफ देखने को मिलते हैं। संजय गांधी जैविक उद्यान के पास भारतीय गैंडे, अजगर, दरियाई घोड़े, सफेद मोर और मगरमच्छ भी हैं।

बुद्ध स्मृति पार्क

बुद्ध स्मृति पार्क मूल रूप से बुद्ध मेमोरियल पार्क के रूप में भी जाना जाता है। यह पार्क भगवान बुद्ध के सम्मान में स्थापित किया गया है। पार्क का उद्घाटन दलाई लामा ने महात्मा बुद्ध की 2554वीं जयंती पर किया था। 22 एकड़ के क्षेत्र में फैले इस पार्क को 125 करोड़ रुपये के बजट के साथ बनाया गया था। इसके अलावा अगर आप यहां आते हैं तो लेजर और साउंड शो देखना न भूलें।

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