केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में नामांकन के लिए एनटीए लेगी परीक्षा, यूजीसी ने जारी की अधिसूचना

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देश के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में स्नातक कोर्स में नामांकन के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा होगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने परीक्षा के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। यूजीसी ने घोषणा कर दी है कि सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आगामी शैक्षणिक वर्ष यानी 2022-23 से सभी स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश परीक्षा के आधार पर नामांकन लिया जाएगा। इस साल से किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्नातक प्रवेश के लिए 12वीं के अंकों को नहीं जोड़ा जाएगा। प्रवेश परीक्षा के अंकों के आधार पर नामांकन होगा।

आवेदन की प्रक्रिया अप्रैल के अंतिम सप्ताह में शुरू हो जाएगी। इसके लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। जुलाई के पहले सप्ताह में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीयूईटी परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। स्नातकोत्तर के लिए कोई फैसला नहीं लिया गया है। परीक्षार्थी परीक्षा से संबंधित जानकारी एनटीए की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं।
यूजीसी के अनुसार सभी 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों को अपने स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीयूसीईटी परीक्षा के आधार पर ही नामांकन देना होगा। हालांकि, स्नातकोत्तर प्रवेश के लिए, विश्वविद्यालयों के पास अभी भी सीयूसीईटी स्कोर का उपयोग पहले की तरह करने की छूट होगी। स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के लिए कई विश्वविद्यालय भी सीयूसीईटी स्कोर का उपयोग करने के लिए इच्छुक हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय सहित कुछ विश्वविद्यालयों ने पहले ही केवल सीयूईटी स्कोर के आधार पर स्नातक प्रवेश आयोजित करने की घोषणा की है। यह परीक्षा एक कम्प्यूटरीकृत परीक्षा होगी। परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित की जाएगी। इनमें अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती, असमिया, बंगाली, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, तमिल, तेलगू और उर्दू शामिल है। कोई विश्वविद्यालय स्थानीय छात्रों या आंतरिक छात्रों के लिए एक निश्चित प्रतिशत आरक्षित रखा गया है। वह ऐसा करना जारी रखेगा। फर्क सिर्फ इतना है कि इन छात्रों को भी सीयूईटी के माध्यम से उन छात्रों की तरह आना होगा जिन्हें सामान्य सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। विश्वविद्यालयों की आरक्षण नीतियां और अध्यादेश अपरिवर्तित रहेंगे।

इस बीच, यूजीसी ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों को सीयूईटी से छूट दी है। भारतीय छात्रों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों को मौजूदा अभ्यास के अनुसार विश्वविद्यालयों में अधिसंख्य आधार पर प्रवेश दिया जाता रहेगा।

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