कांवर यात्रा से बिहार में 2000 करोड़ रुपये का कारोबार, अकेले भागलपुर में 500 करोड़ का बिजनेस

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बिहार में सावन महीना शुरू होते ही कांवर यात्रा भी शुरू हो गई है। श्रावणी मेले के दौरान करीब एक महीने तक चलने वाली कांवर यात्रा से बिहार में 2000 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है। अकेले भागलपुर जिले में इस दौरान 500 करोड़ रुपये का बिजनेस होगा। जिले के सुल्तानगंज में बाबा अजगैवीनाथ धाम पर स्थित गंगा घाट से श्रावणी मेले के दौरान 40 लाख से ज्यादा कांवरिये जल उठाएंगे और देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम जाकर जलाभिषेक करेंगे।

सावन में कोसी, सीमांचल और पूर्वी बिहार के जिलों में छह सौ करोड़ रुपए का कारोबार होने की संभावना है। इसमें सिर्फ भागलपुर जिले में पांच सौ करोड़ रुपए के कारोबार की संभावना है। उम्मीद है कि इस बार सुल्तानगंज में लगभग 40 लाख कांवरिया जल उठाएंगे। उस अनुसार भागलपुर जिले में इस बार पांच से छह सौ करोड़ का कारोबार होने की संभावना है।

मधेपुरा, कटिहार और लखीसराय जिले में भी स्थानीय शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। इन जिलों में भी कम से कम 10-10 करोड़ रुपए का कारोबार एक माह में होने की संभावना है। जमुई और मुंगेर जिले में पांच-पांच करोड़ तो बांका जिले में 25 करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना है। इसके अलावा सहरसा, सुपौल, अररिया, पूर्णिया, खगड़िया जैसे जिले में भी एक से दो करोड़ रुपये के कारोबार की संभावना है।

पटना के कांवरिये सौ करोड़ रुपये करते हैं खर्च

पटना से कांवरियों के जत्थे शिव धाम के लिए रवाना होने लगे हैं। पटना का सावन बाजार लगभग पचास करोड़ रुपये का है। बाजार के जानकार कांवरियों के पटना से देवघर आने-जाने का किराया, तीन-चार दिन खाने-पीने पर होने वाले खर्च, प्रसाद और खिलौने आदि पर पचास करोड़ रुपये औसतन खर्च करने का अनुमान लगाते हैं। पटना न्यू मार्केट के कारोबारी कहते हैं कि कपड़ों की कीमत बढ़ने के कारण भी लोगों का खर्च बढ़ा है।

एक कांवरिया औसतन 2500 रुपये खर्च करता है

बीते दो साल कोरोना पाबंदियों के चलते कांवर यात्रा नहीं हो पाई थी। अब दो साल बाद शिवभक्त टोलियां बनाकर कांवरिया यात्रा पर निकल रहे हैं। कांवर यात्रा पर हाफ पैन्ट, गंजी, तौलिया, चादर, लोटा, कांवर, पूजा सामग्री, प्रसाद आदि की खरीद पर लगभग दो हजार करोड़ के कारोबार का अनुमान है। इसमें चाय, नाश्ता, खाना, कोल्ड ड्रिंक्स आदि पर खर्चा भी शामिल है। एक कांवरिया को इन जरूरी सामान की खरीदारी पर औसतन 1000 से 2500 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

पटना का सावन बाजार लगभग सौ करोड़ रुपये का है। वहीं भोजपुर, बक्सर, नालंदा,कैमूर, रोहतास, नवादा, सारण, वैशाली, सीवान, जहानाबाद और गया में कुल 289.85 करोड़ का कारोबार होता है। उत्तर बिहार, कोसी, सीमांचल और पूर्वी बिहार में छह-छह सौ करोड़ रुपये कांवरिये खर्च करेंगे। भोजपुर से बाबा वैद्यनाथ धाम, गुप्ता धाम समेत विभिन्न स्थानों की कांवर यात्रा में करीब चार लाख से अधिक कांवरिया जाएंगे और 50 करोड़ के कारोबार की उम्मीद है।

बक्सर से तीन हजार कांवरिये रोज जाते हैं और सावन में 15 करोड़ का कारोबार होता है। नालंदा से सावन में 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबाधाम जाते हैं और करीब 45 करोड़ के कारोबार का अनुमान है। कैमूर में एक कांवर यात्री 1600 रुपए खर्च करते हैं और यहां से करीब 10 हजार कांवर यात्री बाबाधाम जाते हैं। औसतन 1.60 करोड़ का कारोबार होगा।

रोहतास में 16.20 करोड़, नवादा में 62.5 करोड़, जहानाबाद में 20 करोड़, सारण से लगभग 60 करोड़ और सीवान में 30 करोड़ का कारोबार होता है। वैशाली जिले से करीब एक लाख भक्त बाबा गरीबनाथ व बाबा धाम के लिए कांवर यात्रा पर निकलेंगे। यहां सवा करोड़ का कारोबार का अनुमान है। वहीं गया में 5 करोड़ के कांवर यात्रा से संबंधित सामान की बिक्री होने का अनुमान है।

उत्तर बिहार में छह सौ करोड़ पूजा पर खर्च करेंगे कांवरिये  

मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार के सभी जिलों में पूरे सावन में करीब छह सौ करोड़ के सामान की खरीदारी कांवरिये करते हैं। इस दौरान अकेले मुजफ्फरपुर में करीब 10 लाख श्रद्धालु कांवर यात्रा करते हैं। इस तरह करीब दो सौ करोड़ रुपये की खरीदारी सिर्फ मुजफ्फरपुर में होती है। गरीबनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी ने बताया कि वर्ष 2019 की तुलना इस बार पांच लाख अधिक श्रद्धालुओं की पहुंचने की उम्मीद है।

मधुबनी में पांच लाख श्रद्धालु स्थानीय शिवालयों व देवघर की यात्रा करते हैं। जिले के श्रद्धालु एक सौ करोड़ रुपये खर्च करते हैं। दरभंगा के कुशेश्वरस्थान में व गंगेश्वरनाथ शिव मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। सावन में कुशेश्वरस्थान में करीब 10 लाख लोग कांवर लेकर पहुंचते हैं। गंगेश्वरस्थान में करीब डेढ़ लाख लोग पहुंचते हैं।

कुशेश्वरस्थान के लिए श्रद्धालु करीब दो सौ करोड़ से ज्यादा के सामान खरीदते हैं। समस्तीपुर से करीब 25 हजार कांवरिये देवघर, बाबा गरीबनाथ और विद्यापतिधाम के लिए यात्रा करते हैं। पूर्वी व पश्चिमी चंपारण में लगभग दो लाख श्रद्धालु कांवर यात्रा करते हैं।

 

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