भारत की कंचनमाला पाण्डे ने विश्व पैरा तैराकी चैंपियनशिप में देश की ओर से स्वर्ण पदक जीता है। कंचनमाला ब्लाइंड स्वीमर हैं। कंचनमाला पिछले दिनों इसलिये चर्चा में रही थी कि इन्हें चैंपियनशिप खेलने के लिये किसी से पैसे उधार लेने पड़े थे। भारत की पैरा ओलंपिक कमिटी ने इसके लिये उनकी कोई मदद नहीं की थी।

इसके बावजूद मैक्सिको में चल रही विश्व पैरा तैराकी चैंपियनशिप में गुरुवार को नागपुर की कंचनमाला पांडे ने गोल्‍ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला तैराक बन गईं हैं।

मेक्सिको में जारी चैंपियनशिप में पांडे ने एस-11 वर्ग के 200 मीटर मेडले इवेंट में शीर्ष स्थान हासिल किया। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) में कार्यरत कंचनमाला ने बताया कि  उनको मेडल जीतने की उम्मीद ज़रूर थी, लेकिन गोल्ड मेडल जीतने की उन्हें बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी।

इस तरह की जीत और खासकर जब महिलाओं की तरफ़ से आती है तो ये सरकार के लिये एक बड़ी सीख होती है। क्रिकेट को छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी खेलों में खिलाड़ियों की पूरी निर्भरता अपने राज्य या केंद्र सरकार पर होती है। लेकिन यह कोई पहली बार नहीं जब यह सुनने को आया है कि कई बड़े टूर्नामेंट में भी सरकार की तरफ़ से खिलाड़ियों को मदद नहीं की गई। यह छोटे से बड़े हर स्तर तक है जिसे सुधारने की सख्त जरूरत है।

 

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