कल्पवास मेले में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़, देश विदेश से आते हैं पर्यटक; सिमरिया गंगा घाट का नजारा है अद्भुत् और खास

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बिहार के सिमरिया घाट गंगातट का नजारा बेहद ही खास है। देश विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए सिमरिया धाम में बिहार पर्यटन विभाग ने सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं। बेगूसराय शहर से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर गंगा किनारे कल्पवास मेले में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है। देश विदेश से आये श्रद्धालु हर साल आयोजित होने वाले कल्पवास मेले में गंगा घाटों के किनारे तंबू लगाकर लगभग डेढ़ महीने तक रहते हैं। सिमरिया गंगा घाट पर ही कई दर्शनीय और आकर्षक मंदिर हैं। घाट की सीढ़ियों से गंगा नदी का नजारा बिलकुल ही अद्भुत है।

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गंगा तट पर लगता है कल्पवास मेला 

सिमरिया धाम गंगा घाट के किनारे राजकीय कल्पवास मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में मुख्यतया बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के लोग बढ़ चढ़कर घूमने आते हैं। वहीं बांग्लादेश, नेपाल के पर्यटक भी इस घाट पर गंगा स्नान और कालवास व्रत रखने के लिए आते हैं। बिहार में सिमरिया धाम से ही गंगा जल भर कर नवरात्रि की शुरुआत भी की जाती है। कल्पवास मेले में टेंट सिटी भी बनाई जाती है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए बस की सुविधा भी उपलब्ध रहती है।

बोटिंग का उठा सकते हैं लुत्फ

सिमरिया गंगाघाट पर पर्यटक बोटिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। धार्मिक स्थल होने के साथ साथ गंगा नदी में बोटिंग का नजारा लिया जा सकता है। फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए नदी से घाटों का दृश्य कैमरे में कैद किया जा सकता है।

महाकवि दिनकर की जन्मभूमि है सिमरिया

हिंदी के प्रसिद्ध लेखक और कवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि भी सिमरिया है। दिनकर के पैतृक घर और उनका स्मारक भी दर्शनीय स्थल हैं। सिमरिया शांत वातावरण और हरियाली के बीच बसा हुआ है। नेचर लवर और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह रमणीय स्थल है।

 

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