कलाम जी के द्वितीय पुण्यतिथि पर परिचर्चा आयोजित

सच्चा हिंदुस्तानी

भारत के मिसाईल मैन व पूर्व राष्ट्रपति डा.ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साहब के द्वितीय पुण्यतिथि पर बीएसएस क्लब में कलाम जी के जीवनी के पर निबंध प्रतियोगिता के बाद कलाम साहब के जीवनी के ऊपर परिचर्चा आयोजित किया गया।परिचर्चा में बतौर मुख्य वक्ता प्रसिद्ध इतिहासकार डा.विनोद कुमार तिवारी ने परिचर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि कलाम साहब का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वरम के धनुषकोड़ी गांव में हुआ था। उनके माता-पिता बहुत ही गरीब थे। उनके पिता जी रामेश्वरम के समुद्र तट मछली पकड़ने का काम करते थे।कलाम साहब बचपन में पिता के व्यवसाय में हाथ बटाने का कार्य करते थे। इसके अलावा पेपर बेचने का काम करते थे।

कभी-कभी वो भूखे सो जाते थे तो कभी-कभी रामेश्वरम मंदिर से प्रसाद मांग कर खाकर सो जाते थे।इसके उन्होंने मद्रास इंजीनियरिंग काॅलेज से इंजीनियरिंग का कोर्स किया और फिर इसरो में साईंन्सिट्स बने। इसके बाद उन्होंने पीछे लौट कर नही देखा।आगे चलकर भारत के मिसाईल मैन कहलाये उसके बाद उन्हें भारतरत्न से सम्मानित किया गया।

बाद में चलकर भारत के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति पद को सुशोभित किया।कलाम साहब बच्चों और युवाओं के बीच खूब प्रेरणास्रोत रहे।बच्चों के स्कूल जाकर उनसे मिलकर कैरियर के बारे में पूछते थे।उनका देहावसान 27 जुलाई 2015 को आईआईएम शिलांग में छात्रों के बीच संबोधित करते हुए हुआ ।जब कालाम साहब का मृत्यु हुआ तो सारे युवाओं और बच्चों के बीच मातम सा छा गया था। कई युवाओं तो कई दिनों तक उनके याद में खाना तक नही खाया।अंत में उन्होंने कलाम के जीवनी से छात्र-छात्राओं को सीख लेने की नसीहत दी।अन्य वक्ताओं में यू.आर.कांलेज के पूर्व वनस्पति विभाध्यक्ष गौड़ीशंकर प्रसाद सिंह,अमित झा,लक्ष्मी सिंह नें संबोधित किया।

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