कैसे पूरा होगा बच्चों का सिलेबस, इस जिले के हाईस्कूल में छात्रों के बैठने के लिए न बेंच हैं और न पढ़ाने को शिक्षक

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औरंगाबाद जिले के अंबा कुटुंबा प्रखंड के हाई स्कूल घेउरा में न तो छात्रों को बैठने के लिए बेंच है और न ही सभी विषयों की पढ़ाई के लिए पर्याप्त शिक्षक। ऐसे में छात्रों का सिलेबस कैसे पूरा होगा यह चिंता का विषय है। मात्र दो शिक्षकों के भरोसे यह विद्यालय संचालित है। अरविंद कुमार पासवान सामाजिक विज्ञान के और राकेश कुमार पाठक विज्ञान विषय के शिक्षक है। भाषा विषयों की पढ़ाई के लिए यहां एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं है।

हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत की पढ़ाई यहां नहीं के बराबर होती है। इन्हीं शिक्षकों में से कभी कोई भाषा के विषयों की पढ़ाई कराने का प्रयास करते पाए जाते हैं। गणित की पढ़ाई कराने वाला भी कोई नहीं है। विज्ञान के शिक्षक रसायन व जीव विज्ञान की कक्षाएं लेते हैं, पर गणित और भौतिकी की कक्षाएं कम ही होती है। ऐसे में छात्रों की सभी विषयों की पढ़ाई नहीं हो पाती है। इन्हीं दो शिक्षकों को विद्यालय से जुड़े अन्य कार्य भी करने होते हैं।

विद्यालय के कार्य में किसी शिक्षक के व्यस्त होने की स्थिति में या तो दोनों कक्षाएं संयुक्त चलानी पड़ती है या फिर कोई एक कक्षा खाली रह जाती है। बेंच उपलब्ध न होने के चलते नवम व दशम वर्ग के छात्रों को भी दरी पर बैठना पड़ता है। इससे बच्चे हीनभावना के शिकार होते हैं। निधि सूची विद्यालय के पास करोड़ों की लागत से बना दो मंजिला विशाल भवन है। इसकी विशालता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि भवन के सभी कमरों का नित्य उपयोग भी नहीं हो पाता। नीचे के तल्ले में कार्यालय है।

कक्षाएं भी इसी तल्ले के दो कमरों में सजती है। प्रयोगशाला की सुविधा उपलब्ध है। स्मार्ट क्लास बनाया गया है। पुस्तकालय में कुछ पुस्तकें हैं। परिसर के समीप बड़ा खेल का भी मैदान है। विद्यालय में यदि पर्याप्त शिक्षक व बेंच-डेस्क की सुविधा उपलब्ध हो तो यहां एक अच्छे से अच्छे शैक्षिक वातावरण का निर्माण किया जा सकता है। प्रभारी प्रधानाध्यापक लाल मोहन प्रसाद बताते हैं कि उपलब्ध संसाधनों में बेहतर शैक्षिक वातावरण देने का हरसंभव प्रयास किया जाता है। कोशिश की जाती है कि छात्रों को सभी विषयों की पढ़ाई हो। शिक्षक की कमी के चलते परेशानियां होती है।

चतुर्थवर्गीय कर्मी के अभाव में विद्यालय की साफ सफाई होती है प्रभावित

विद्यालय के पास बड़ा भवन और बड़ा खेल परिसर भले ही हो पर देश की साफ-सफाई के लिए चतुर्थवर्गीय कर्मी न हो तो परेशानी होना स्वाभाविक है। प्रबंधन चाहकर भी बेहतर साफ-सफाई नहीं करा सकता। ऐसे में आसपास गंदगी का आलम स्वाभाविक सा है। स्कूल की स्थिति यह है कि विद्यालय के पास जितने कमरे हैं उनमें प्रतिदिन झाड़ू लगाने के लिए भी एक कर्मी की आवश्यकता है। फिलहाल किसी तरह काम चलाया जा रहा है। शिक्षक और सड़क छात्रों के समेकित प्रयास से परिसर को साफ-सुथरा रखने का प्रयास किया जाता है।

सभी विषयों की पढ़ाई नहीं होने के चलते बच्चों को करना पड़ता कोचिंग का रुख

स्कूल में जल्दी सभी विषयों की पढ़ाई नियमित रूप से हो और सिलेबस पूरा कर दिया जाए तो बच्चों को कोचिंग की ओर रुख करने की दरकार नहीं होगी। पर ऐसा नहीं हो रहा है। स्कूल में शिक्षकों की कमी के चलते सभी विषयों की पढ़ाई नहीं हो पाती है। दशम के छात्रों को अगले वर्ष मैट्रिक बोर्ड की परीक्षा में शामिल होना है। ऐसे में उनकी सभी विषयों की तैयारी पक्की होनी चाहिए। स्कूल में पढ़ाई न हो पाने के चलते बच्चे कोचिंग का रुख अपनाने को विवश होते हैं। ऐसे में स्कूल के छात्रों की उपस्थिति भी कम हो जाती है।

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