कैसे होगी बिहार की आंतरिक सुरक्षा? नीतीश सरकार ने बनाया ये प्लान

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बिहार की नीतीश सरकार सरकार ने सूबे की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को और दुरुस्त करने का निर्णय लिया है। इसको लेकर इंटरनल सिक्योरिटी सिस्टम डेटाबेस बनाया जा रहा है। गृह विभाग ने आईएसएस डेटाबेस बनाने के लिए सोमवार को सभी जिलों से 26 बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। सभी 38 जिलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर सूबे का आईएसएस डेटाबेस तैयार किया जाएगा।

राज्य के आंतरिक सुरक्षा के पुराने ढांचे को अब बदला जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। सरकार के निर्देश पर गृह विभाग ने इसके लिए सभी जिलों को निर्देश जारी किये हैं। निर्देश के तहत जिला प्रशासन, पुलिस व स्वास्थ्य सहित तमाम विभागों को अपनी अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है। सभी विभागों से रिपोर्ट समेकित होकर जिला प्रशासन के माध्यम से गृह विभाग को जाएगी। गृह विभाग जिलों से मिली रिपोर्ट के आधार पर आंतरिक सुरक्षा की रणनीति तय करेगा और अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को देगा। जिलों से सभी विभागों से जो रिपोर्ट जाने वाली हैं, उनमें कुछ तो सामान्य स्तर की हैं, जिनकी रिपोर्ट पहले भी जारी होती रही है, लेकिन आंतरिक सुरक्षा के मद्देनजर रिपोर्ट का दायरा इस बार 26 बिंदुओं तक बढ़ाया गया है। गृह विभाग ने जिलों को इस रपोर्ट के लिए 15 दिनों का समय दिया है, ताकि पूरा डेटाबेस बनाकर उसे गृह मंत्रालय को भेजा जा सके।

 

जिलों की रिपोर्ट में ये बिंदु होंगे शामिल

जिलों को उन स्थलों की सूची भेजनी है, जो संवेदनशील हैं। जहां पहले कोई बड़ी घटना हो चुकी है या जो इस दृष्टिकोण से संवेदनशील है। इसके अलावा जिले के सभी बड़े संस्थान, प्रतिष्ठान, कार्यालय आदि की विवरणी अक्षांश-देशांतर के साथ उपलब्ध करानी है। 26 बिंदुओं में यह भी बताना है कि जिले में कौन-कौन से प्रमुख प्रतिष्ठान, स्थल व परिसर जोखिम भरे क्षेत्र में स्थित हैं। इसके अलावा उन क्षेत्रों, परिसर, भवन की भी रिपोर्ट देनी हैं, जहां आमलोगों का प्रवेश वर्जित हैं या जहां की फोटोग्राफी पर मनाही है। इसके अलावा आतंकियों से साठगांठ रखने वाले विदेशी तत्वों की पहचान के संबंध में गोपनीय रिपोर्ट देनी है। आईएसएस के डेटाबेस में इनके अलावा विदेशी व्यापार प्रतिष्ठान, वैसे सोशल मीडिया सूत्रों की पहचान जो देश विरोधी गतिविधि व भावना हो भड़काने वाले हैं, उनकी पहचान का भी डेटाबेस बनाया जाएगा।

बंदियों के नाम भी रहेंगे डेटाबेस में

उक्त बिन्दुओं के अलावा सूबे के जेलों में बंद सभी प्रमुख लोगों व कुख्यातों के रिकार्ड भी डेटा बेस में दर्ज रहेंगे। इसके अलावा उन स्थलों की भी सूची बनाकर भेजी जानी है, जिसे दुश्मन देश निशाना बना सकते हैं। वहीं राज्य के उन व्यक्ति, संस्थान व संगठन का भी डेटा बनेगा, जिनकी मदद किसी इमरजेंसी के समय ली जा सकती हो। और इन 26 बिंदुओं में राज्य के सभी स्कूल, अस्पताल, सरकारी भवन, अग्निशमन कार्यालय, थाने आदि की रिपोर्ट भी शामिल रहेगी।

 

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