कभी घर-घर बेचते थे कपड़ा, आज दे रहे सौ युवकों को रोजगार

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यह कहानी है ऐसे एक युवक की है जो महाजन से कपड़े लेकर घर-घर जाकर बेचते थे। एक दशक बाद फिर महाजनों से कपड़ा लेकर दूसरे राज्यों के व्यापारियों को कपड़ा बेचने लगे। दस साल में अपने कुशल व्यवहार व कपड़ों की क्वालिटी से बाहर के व्यापारियों का भरोसा जीत लिया। एक दिन बाहर के व्यापारियों ने इसे खुद का व्यापार शुरू करने की सलाह दी। साथ ही कुछ पूंजी उपलब्ध करायी। इसके बाद युवक अब प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सौ लोगों को रोजगार दे रहा है। बात हो रही है भागलपुर के नाथनगर के गोलदारपट्टी के 34 वर्षीय युवक मनोज कुमार की, जिन्होंने दरियापुर स्थित अपनी जमीन पर कपड़ा मिल का संचालन कर रहे हैं। यहां अभी 36 पावरलूम चल रहे हैं।

मनोज के उद्योग में  खादी, कॉटन, लिनन, चादर, खादी धोती तैयार कर रहे हैं। उनके पास बाजार की कोई कमी नहीं है। यहां का माल दिल्ली, कानपुर, बनारस, अहमदाबाद, बेंगलुरु, पटना, गया, मुजफ्फरपुर आदि जगहों पर जा रहा है। मनोज इस मिल में कॉटन साड़ी जल्द तैयार करने की योजना पर काम कर रहे हैं। जल्द ही यहां महिलाओं के लिए ब्लाउज भी तैयार होगा। उन्होंने बताया कि अभी सूरत व महाराष्ट्र से कुर्ती आता है। रिउन कुर्ता भी यहां जल्द बनाया जायेगा।

पांच हजार को मिलेगा रोजगार

मनोज ने बताया कि अभी 37 पावरलूम हैं। जल्द ही यहां 25 सौ लूम बैठाने का लक्ष्य रखा गया है। जिस दिन इतना लूम बैठ जायेगा उसी समय पांच हजार लोगों की जरूरत पड़ेगी। वो चाहते हैं कि दूसरे राज्यों में जो बुनकर काम कर रहे हैं वो इस मिल में और अपने क्षेत्र में काम करें। महाराष्ट्र जैसे शहरों में अधिकांश बुनकर इसी क्षेत्र के हैं।

 

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