आज पटना के बांसघाट में लगती है तांत्रिकों की भीड़, कालरात्रि की पूजा कर मांगते हैं शक्ति

आस्था

पटना का ‘बांस घाट’ इन दिनों तंत्र सिद्धी का केंद्र बन गया है। दूर दूर से लोग यहां तंत्र विद्या की सिद्धि के लिए आने लगे हैं। आधी रात के बाद यहां के श्मशान में साधक ध्यान लगाते हैं।

नवरात्र में तंत्र साधना के लिए लोग श्मशान में क्यों ध्यान लगाते हैं इस संबंध में हमने बांस घाट में ठहरे कुछ अघोरी बाबाओं से बात की।

मध्यप्रदेश के सतना के रहने वाले मुन्ना गिरी और असम के गुवाहाटी के रहने वाले बाबा पुष्कर पटना के साधुओं के साथ बैठकर अपनी साधना की तैयारी कर रहे हैं।

ये लोग असम के मयांग (इसे तांत्रिक लोग जादू की नगरी कहते हैं) से अपनी तंत्र मंत्र की सिद्धी कर पटना पहुंचे हैं।

बाबा मुन्ना गिरी ने कहा कि शांति और शक्ति के लिए अघोरी कालरात्रि (अष्टमी) को पूजा करते हैं। पटना शक्ति साधना का पुराना केंद्र है।

यहां पर शिव और पार्वती ने समय गुजारा है। मां दुर्गा भी यहां आईं थी। इसलिए हम लोग यहां आकर साधना करते हैं।

नवरात्र के आठवें दिन कालरात्रि की पूजा की जाती है। आज मां काली धरती पर आती हैं। मां काली सबसे पहले श्मशान में आती हैं।

वो चिता की राख से भस्म श्रृंगार करती हैं। इसके बाद वो अपने भक्तों से मिलती हैं। चिता में सब एक समान होता है।

यहां सबको जलकर राख हो जाना है। श्मशान में इंसान अपनी आत्मा के सबसे करीब होता है।

इसीलिए साधक साधना के लिए इसी को चुनता है। श्मशान में जलती चिताओं के बीच जब साधक ध्यान लगाता है तो उसे इसका फल अवश्य मिलता है।

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