ज्यादातर निजी अस्पतालों में क्यों जा रहे हैं आयुष्मान भारत के मरीज! आयुक्त ने सिविल सर्जन से मांगा जवाब

कही-सुनी जानकारी

भागलपुर जिले के आयुक्त दयानिधान पांडेय ने बुधवार को आयुष्मान भारत योजना और जेनरिक दवा की समीक्षा की। समीक्षा में पाया गया कि आयुष्मान भारत योजना के मरीज अधिक संख्या में निजी अस्पतालों में जा रहे हैं। आयुक्त ने सिविल सर्जन से इसके कारणों के बारे में जानकारी मांगी और कहा कि पता करें कहीं बिचौलियों की भूमिका तो इसमें नहीं है।

आयुक्त के सचिव मो. वारिस खान ने बताया कि बैठक में आयुष्मान कार्ड की प्रगति संतोषजनक नहीं पायी गयी। आयुक्त ने इस पर नाराजगी जताते हुए अभियान चलाकर कार्ड बनाने का निर्देश दिया। बैठक में बताया गया कि जिले में 14 लाख से अधिक लोगों का आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्ड बनाना है। उसमें से दो लाख 11 हजार लोगों का कार्ड बना है। आयुक्त ने सिविल सर्जन से कम कार्ड बनने के कारणों की जानकारी मांगी।

सिविल सर्जन द्वारा बताया गया कि जागरूकता के अभाव में कम लोग कार्ड बनवाने आ रहे हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार और वर्तमान के दस्तावेजों में अंतर आने के चलते भी सभी का कार्ड बनाने में परेशानी हो रही है। समीक्षा में पाया गया कि नाथनगर में अधिक और ग्रामीण क्षेत्र के प्रखंडों में कार्ड बनाने की संख्या काफी कम है। जिले के 17 गांवों में एक भी कार्ड नहीं बना है।

आयुक्त ने प्रखंडवार बैनर और गाड़ी के साथ प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। माइकिंग व नुक्कड़ नाटक के अलावा पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया। बैठक में बताया गया कि आयुष्मान कार्ड के तहत मरीजों का इलाज छह निजी और 18 सरकारी अस्पतालों में हो रहा है। आयुक्त ने सिविल सर्जन से अगली बैठक में निजी और सरकारी अस्पतालों में इस योजना के तहत हुए इलाज का आंकड़ा लाने का निर्देश दिया।

आयुक्त ने कहा कि जेनरिक दवा को बढ़ावा देना है। किसी भी सूरत में डॉक्टर ब्रांडेड दवा मरीजों को नहीं लिखें। पीएचसी और सभी प्रखंडों में जेनरिक दवा का काउंटर होना चाहिए। आयुक्त ने सिविल सर्जन को भागलपुर और क्षेत्रीय अपर निदेशक स्वास्थ्य भागलपुर प्रमंडल को बांका जिले के सभी पीएचसी में जेनरिक दवा की दुकानों की जांच करने का निर्देश दिया। अगर जेनरिक दवा की दुकान नहीं मिली तो कार्रवाई की जाएगी। आयुक्त ने कहा कि सरकारी अस्पताल में डाक्टरों द्वारा मरीजों को चिह्वा पर जो दवा लिखी जाती है, उसकी एक प्रति स्वास्थ्य प्रबंधक के पास रखा जाएगा।

 

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