अभी-अभी : विकास को लेकर RJD-JDU-BJP एक साथ, कहा- बिहार को मिले विशेष दर्जा

खबरें बिहार की

पटना: अभी अभी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि बिहार की विकास को लेकर राजद, जदयू, कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने सहमति जताई है। विधान सभा में सर्वदलीय बैठक के दौरान आपसी मतभेद को बुलाकार सबने एक स्वर में हां में हां मिलाया। सभी ने कहा कि विशेष राज्य के दर्जा बिहार को मिलना ही चाहिए। बिहार की धरती से हम सभी केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि उसे उसके अधिकार से वंचित ना रखा जाए।

कैसे मिलता है विशेष राज्य का दर्जा
इसके पहले कि आपको विशेष राज्य के फायदे के बारे में बताएं। इसके पहले आपको बताते है कि आखिर कैसे मिलता है विशेष राज्य का दर्जा? किसी राज्य की भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक और संसाधन के लिहाज से उसकी क्या स्थिति है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है। विशेष राज्य का दर्जा कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। केंद्र सरकार अपने विवेक से उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष राज्य का दर्जा देती है।

13 district bihar new india

1969 में पांचवें वित्त आयोग के कहने पर केंद्र सरकार ने तीन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था। नेशनल डेवलपमेंट काउंसिल ने पहाड़, दुर्गम क्षेत्र, कम जनसंख्या, आदिवासी इलाका, अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर प्रति व्यक्ति आय और कम राजस्व के आधार पर इन राज्यों की पहचान की थी। 1969 में असम, नगालैंड और जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्ज दिया गया था। बाद में अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, त्रिपुरा, हिमाचल और उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्ज मिला।

किन राज्यों को कब मिला विशेष राज्य का दर्जा
असम- 1969
नागालैंड -1969
जम्मु कश्मीर- 1969
मणिपुर–जनवरी 1972
मेघालय–जनवरी 1972
त्रिपुरा–जनवरी 1972
अरूणाचल प्रदेश– फरवरी 1987
मिजोरम–फरवरी 1987
सिक्किम– जनवरी 1975
हिमाचल प्रदेश- जनवरी 1971
उत्तराखंड- सितंबर 2011

विशेष राज्य के फायदे
अब आपको बताते है कि विशेष राज्य का दर्जा मिलने से किसी राज्य को क्या लाभ होता है। दरअसल, विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों को केंद्र सरकार से 90 फीसदी अनुदान मिलता है। इसका मतलब केंद्र सरकार से जो फंडिंग की जाती है उसमें 90 फीसदी अनुदान के तौर पर मिलती है और बाकी 10 फीसदी रकम बिना किसी ब्याज के मिलती है। जिन राज्यों को विशेष दर्जा प्राप्त नहीं है उन्हें केवल 30 फीसदी राशि अनुदान के रूप में मिलती है और  70 फीसदी रकम उनपर केंद्र का कर्ज होता है।

इसके अलावा विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को एक्साइज, कस्टम, कॉर्पोरेट, इनकम टैक्स में भी रियायत मिलती है। केंद्र सरकार हर साल प्लान बजट बनाती है।।प्लान बजट में से 30 फीसदी रकम विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को मिलता है। अगर विशेष राज्य जारी बजट को खर्च नहीं कर पाती है तो पैसा अगले वित्त वर्ष के लिए जारी कर दिया जाता है।

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा क्यों 
दरअसल, बिहार भारत का दूसरा सबसे बड़ी आबादी वाला गरीब राज्य है। राज्य की आबादी समूचित सिंचाई के अभाव में मॉनसून, बाढ़ और सूखे के बीच निम्न उत्पादकता वाली खेती पर अपनी जीविका के लिए निर्भर है। हालांकि फिलहाल सिचाई के लिए अब बिहार में दो बिजली की लाइने बिछायी जा रही है। दो में से एक फीडर सिर्फ किसानों यानि खेती के लिये होगा।

Source: live bihar

Leave a Reply

Your email address will not be published.