जरा सी असावधानी बना रही मौसमी बीमारियों का शिकार, खानपान में सावधानी व बचाव से दें गर्मी को मात

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बीते कई सालों बाद इस बार गर्मी का प्रकोप ज्यादा है। इसलिए कामकाज के लिए घर से बाहर निकलने वालों को लू की चपेट में आने की आशंका ज्यादा है। इस साल अप्रैल माह से ही तापमान ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे। हालात यह हैं कि तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रह रहा है। ऐसे में जरा सी असावधानी सेहत बिगाड़ सकती है। तापमान में वृद्धि के कारण डिहाइड्रेट होने का खतरा अधिक रहता है। इससे बचने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें।

40 वर्ष से अधिक आयु व ब्लड प्रेशर, हृदय, किडनी और डायबिटीज की बीमारी से ग्रसित लोगों में पसीना अधिक निकलता है। इसके कारण इलेक्ट्रोलाइट की कमी होती है। जिससे बेहोशी, चक्कर आना, घबराहट आदि समस्याएं हो सकती हैं। इनसे बचने के लिए पेय पदार्थों का सेवन करें। नींबू पानी, शिकंजी, शर्बत, छाछ, लस्सी, सत्तू आदि के सेवन से गर्मी के प्रकोप से बचे रहेंगे। इसके साथ ही खानपान में स्वच्छता का भी ध्यान रखें।

इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस जरूरी: गर्मी के कारण पानी की कमी और लू के प्रकोप से इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो सकती है। इससे डिहाइड्रेशन की आशंका बढ़ जाती है और गर्मी में होने वाली बीमारियां बहुत जल्दी अपनी चपेट में लेती हैं। इसलिए घर से निकलते वक्त अपने साथ पानी की बोतल अवश्य रखें। घर का बना ताजा व पौष्टिक खाना ही खाएं। शरीर को अच्छी तरह सूती कपड़ों से ढककर रखें।

हो सकती हैं ये परेशानियां: इस समय गर्मी के कारण लूज मोशन, अपच, बुखार, बेहोशी, सिरदर्द, सूखी खांसी, शरीर में भारीपन, चक्कर आना आदि समस्याएं हो सकती हैं। यदि इस तरह की परेशानी होती है तो गंभीरता से लें। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण कुछ मामलों में इसका असर किडनी, दिमाग व हृदय पर पड़ सकता है। कई बार लू लगने पर सांस फूलने की परेशानी भी होती है। ऐसा होने पर घबराने या देर करने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लें।

लू लगने का कारण और लक्षण: तापमान में अचानक बदलाव होने अथवा ज्यादा देर तक धूप व गर्म हवा के संपर्क में रहने से शरीर के तापमान में वृद्धि होती है। इससे अधिक पसीना निकलता है और शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जो लू लगने का कारण बनता है। लू लगने पर शरीर का तापमान 102 डिग्री सेल्शियस या अधिक हो सकता है। इसकी चपेट में आने पर बार-बार पानी पीने के बाद भी प्यास लगना, सिर में भारीपन, सिरदर्द, बेचैनी, चक्कर आना, जी मिचलाना, उल्टी, पसीना आना, त्वचा सूखना, मुंह व आंखें लाल होना आदि परेशानियां होती हैं।

गर्भवतियां रहें सतर्क: इन दिनों हरहाल में लू व धूप से बचकर रहना है। जो महिलाएं गर्भवती हैं, उनके लिए यह मौसम अधिक संवेदनशील है। ऐसी महिलाओं को जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलना चाहिए। ये लोग घर के बने पौष्टिक व सुपाच्य भोजन का सेवन करें। अच्छा रहेगा कि डाइट में तरल पदार्थों को प्राथमिकता दें। अधिक से अधिक आराम करें और चिकित्सकीय सलाह लेती रहें। यदि घर से बाहर जाना पड़े तो धूप से बचने के सारे उपाय अपनाएं।

लू लगने पर करें यह काम: कई बार लू लगने पर तेज बुखार के कारण व्यक्ति बेहोशी की स्थिति में आने लगता है। ऐसे में घबराने के बजाय सबसे पहले पीडि़त व्यक्ति को ठंडी जगह में लिटाएं और गीले कपड़े से उसके शरीर को गीला करें। इससे शरीर का तापमान कम होगा। इसके बाद नींबू पानी या शिंकजी पिलाएं और चिकित्सकीय उपचार कराएं।

जांच और दवाएं जारी रखें: गर्मी का असर डायबिटीज,ब्लड प्रेशर और सांस के रोगियों पर जल्दी होता है। इसलिए इन्हें बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। ये रोगी अपनी दवाएं जारी रखें और समय पर जांच कराते रहें। गर्मी के कारण ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव से इन रोगियों की समस्या बढ़ सकती है।

घर का बना खाना ही खाएं: लू के साथ ही इन दिनों जो भी बीमारियां होती हैं, उनकी वजह गलत खानपान होता है। इसलिए घर का बना ताजा खाना ही खाएं। रसोई में उतना ही खाना बने, जितना एक बार में समाप्त हो जाए। रात का खाना फ्रिज में रखकर फिर सुबह उसका सेवन करने की आदत से बचें। बाहर के खाने से परहेज करें।

इनका सेवन जरूर करें: हरी सब्जियों व मौसमी फलों का सेवन अवश्य करें। खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, अनानास, नारियल पानी, बेल का शर्बत, गन्ने का रस, आदि का सेवन शरीर में पानी की कमी पूरी करने के साथ ही सेहत दुरुस्त रखेगा। कटे फल व सब्जियों की खरीददारी से बचें और घर में भी इन्हें काटकर न रखें।

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