बिहार की संस्कृति का अहम् हिस्सा है जितिया, 13 को 24 घंटे निर्जला रह महिलाएं करेंगी अपने बच्चों की लंबी उम्र की प्रार्थना

संस्कृति और परंपरा

पितृपक्ष के मध्य माताओं के लिए एक खास दिन होता है, जिसे मातृ नवमी कहते हैं। मातृ नवमी 14 सितंबर है। इससे पहले अष्टमी तिथि यानी 13 सितंबर को जितिया व्रत होगा। इस दिन माताएं अपने पुत्र-पुत्रियों के दीर्घायु होने के निमित यह व्रत करती हैं।

जबकि 6 को ऋषि तर्पण के बाद 7 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो रहा है। पितृपक्ष 20 तारीख तक चलेगा। इससे पहले 5 सितंबर को अनंत चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाएगा। भाग्य शुक्ल चतुर्दशी मंगलवार को अनंत भगवान का पूजन होगा। अनंत में 14 गांठ होते हैं।

हर गांठ के अलग-अलग मायने हैं। अनंत भगवान की पूजा में 14 तरह के फल, पुष्प, धूप, नैवेद्य आदि श्रद्धापूर्वक लोग अर्पित करते हैं। समुद्र रूपी भवसागर से पार करने वाले वासुदेव स्वरूप भगवान अनंत हैं। जिनका आदि है अंत है।

ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा के अनुसार सनातन धर्म में देवों पितरों को सामान्य रूप से पूजन करने की परंपरा है।

कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पहले देव पितरों का आशीर्वाद लेने की प्राचीन परंपरा रही है। आश्विन कृष्ण पक्ष को पितरों का समय बतलाया गया है। कई लोग पूरे साल ही प्रतिदिन पितरों का तर्पण करते हैं। जो व्यक्ति पूरे साल तर्पण नहीं करते, वो इन 15 दिनों में अपने पितरों के लिए तर्पण करते हैं।

इससे पितरों की मुक्ति मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही तर्पण करने वाले व्यक्तियों के जीवन में भी विभिन्न क्लेशों का निवारण, सुख-संपदा, आयु, आरोग्यता, यश-कीर्ति भी पितर प्रदान करते हैं। जो व्यक्ति इन 15 दिनों तक भी तर्पण नहीं करते, वे अपने पितरों की तिथि के दिन अवश्य ही तर्पण करें। पुराणों धर्म शास्त्रीय ग्रंथों में गया तर्पण पिंडदान का विशिष्ट महत्व है।

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