जींस-टीशर्ट में जाती हैं गुंडों की खबर लेने, 600 ऑफिसर्स को 1 झटके में कर चुकी हैं बर्खास्त

कही-सुनी

पटना:  देश की बागडोर असल मायने में अफसरों के हाथ में होती है। यदि नौकरशाही दुरुस्त हो तो कानून-व्यवस्था चाकचौबंद रहती है। जिस तरह से भ्रष्टाचार का दीमक नौकरशाही को खोखला किए जा रहा है, लोगों का उससे विश्वास उठता जा रहा है।

कुछ ऐसे भी IAS और IPS अफसर हैं, जो अपनी साख बचाए हुए हैं। उनके कारनामे आज मिशाल के तौर पर पेश किए जा रहे हैं। भारत देश में आज भी लोग महिलाओं को पुरूषों के मुकाबले कमजोर मानते हैं। लेकिन महिलाएं भी किसी से कम नहीं हैं। वो भी कई जगह अपने हुनर का परिचय देने से पीछे नहीं हट रही हैं। देश की महिलाएं लगभग हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति महसूस करा रही हैं। राजनीति हो या नौकरशाही में या प्रतिष्ठित पुलिस बल में रहकर, हर जगह ये अपनी प्रतिभा तो दिखा रही हैं।

कुछ ऐसी ही कहानी है भारत की इन IPS ऑफिसर्स का जो दुश्मनों के लिए काल हैं और आज जनता की रक्षक बन कर अपना दायित्व निभा रही हैं। धीरे-धीरे ही सही भारत में लिंगभेद को मिटाने का काम भी कर रही हैं ये ऑफिसर्स।

Commonwealth Human Rights Initiative (CHRI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल पुलिस बल का केवल 6.11% महिलाओं को बनाया जाता है, जो लगभग 70 साल की आजादी के बाद भी सुरक्षा बलों में लैंगिक असमानता को दर्शाती है। हालांकि, गरीब लिंग अनुपात के साथ, महिला पुलिस आज कहीं आगे बढ़ रही हैं।
किरण बेदी का नाम आज पूरा देश जानता है। भारत की पहली महिला IPS ऑफिसर होने का तम्गा उन्हें हासिल है। उनकी बहादूरी और बेबाक छवि से हर कोई वाकिफ है। लेकिन भारत में कई और IPS ऑफिसर्स हैं, जिन्हें किरण बेदी से कम नहीं आंका जा सकता। उन्होंने भी अपनी लगन से IPS बन कर और अपनी बहादूरी से पूरे देश का मान बढ़ाया है।
आज हम आपको एक ऐसा जांबाज IPS ऑफिसर की कहानी आपके सामने लेकर आए हैं जिन्हें लेडी सिंघम के नाम से लोग जानते हैं। हम बात कर रहे हैं जींस-टीशर्ट पहनकर अपने रौबीले अंदाज में ‘सड़क छाप मनचलों’ के दांत खट्टे करने वाली आईपीएस सोनिया सिंह की जो अभी तत्काल में कानपुर का चार्ज संभाल रही हैं।
अपने पहले ही दिन नई एसएसपी ने शहर की सड़कों पर पैदल ही गश्त शुरू कर दी थी। एसएसपी सोनिया सिंह की धमाकेदार इंट्री देख पुलिसवाले भी दंग रह गए। कानपुर शहर की नई एसएसपी सोनिया सिंह के कामकाज का पहला दिन पुलिसवालों के लिए सबकभरा रहा। वे सिविल ड्रेस में शहर का मिजाज समझने निकल पड़ी।
सहारनपुर निवासी सोनिया सिंह 2003 बैच की नगालैंड कैडर की आईपीएस हैं। वह 2012 में उत्तर प्रदेश में प्रतिनियुक्ति पर आईं हैं। बतौर कप्तान बलरामपुर, उन्नाव, पीलीभीत, सुल्तानपुर, रेलवे लखनऊ और बुलंदशहर में तैनात रह चुकी हैं। एक घचना सोमवार की आई है। कानपुर में स्वरूप नगर थाना क्षेत्र में सड़क पार कर रहे युवकों को एक सिटी बस कुचलते हुए भाग निकली। मौके पर पहुंची पुलिस ने गुस्साए लोगों को शांत कराने की कोशि‍श की। जब माहौल शांत नहीं हुआ तो देर रात डीआईजी सोनिया सिंह हाथ में डंडा लेकर बवालियों के बीच पहुंच गईं। उन्हें देख मिनटों में ही बवाल शांत हो गया।
एसएसपी कानपुर सोनिया सिंह ने कानपुर के 600 स्पेशल पुलिस ऑफिसर (एसपीओ) को बर्खास्त कर दिया था। उनका कहना था कि किसी भी एसपीओ की कार्यशैली ठीक नहीं थी, जिस वजह से उन्हें बर्खास्त किया गया है।
कानपुर शहर में पिछले 3 साल से चली आ रही एसपीओ कमेटी को एसएसपी सोनिया सिंह ने भंग कर दिया था। सोनिया सिंह के मुताबिक एसपीओ का गठन पुलिस प्रशासन के सहयोग करने के साथ अपने अपने इलाके में होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया गया था। लेकिन इनकी खुद की कार्यशैली खराब हो गई थी। इनमें से 150 से ज्यादा एसपीओ आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे। ऐसे में इस कमेटी संस्था को भंग करना पड़ा।
एक बार काकादेव में निरीक्षण के दौरान एसएसआई (सीनियर सब इंस्पेक्टर) रघुनाथ यादव एसएसपी सोनिया सिंह को सैल्यूट करने पहुंच गए। उन्होंने एसएसआई की वर्दी दुरुस्त न मिलने पर उसको यह कहते हुए फटकारा कि कम से कम वर्दी को दुरुस्त रखा करो।
सड़क पर अराजकता करते टेंपो और ई-रिक्शा चालकों और नशेबाजों से सख्ती से निपटने में माहिर हैं एसएसपी सोनिया सिंह। सफेदपोश हो या वर्दी वाला किसी की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करती। इनके राज में पीड़ित की एफआईआर दर्ज होती है और उसे न्याय भी मिलता है। इसमें कोताही बरतने वाले की लाइन में आमद कराई जाती है।
Source: The Hook

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