कौन होगा JDU का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष? क्या नितीश कुमार एक तीर से साधेंगे कई निशाने ?

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सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने ऊपर लग रहे जाति आधारित राजनीति से आहत हैं। इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में वह सभी संभावित नाम के अटकलों पर विराम लगाते हुए चौंकाने वाले नाम पर अपनी मुहर लगा सकते हैं।

बिहार में सत्ता की बागडोर सातवीं बार संभालने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में अपनी पार्टी को मिली सीट से चिंतित है। 2010 में बिहार की नंबर वन पार्टी बनी जनता दल यूनाइटेड 2020 में तीसरे नंबर की पार्टी बन गई है। नीतीश कुमार संगठन को मजबूत करने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं। नीतीश कुमार जानते है कि ऐसे में जनता दल यूनाइटेड पर जाति आधारित राजनीति करने का आरोप लगाया जाना, पार्टी को और भी कमजोर कर सकता है। यही वजह है कि जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान अपने वरिष्ठ सहयोगी और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को सौंप कर नीतीश कुमार एक साथ विरोधियों के साथ-साथ बिहार की जनता को कई संदेश दे सकते हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले भी कई बार लोगों को अपने फैसले से हैरत में डाल चुके हैं। इसलिए इस बार भी हो सकता है की उनके फैसले से लोग चौंक जायेंगे। बिहार सरकार के पूर्व जल संसाधन मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को जनता दल यूनाइटेड का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है। जदयू के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर पीटीआई के ब्यूरो प्रमुख का मानना है कि नीतीश कुमार ऐसा कर सकते हैं। अगर जदयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को पार्टी की कमान सौंपी जाती है, तो इसका फायदा नीतीश कुमार को उत्तर प्रदेश चुनाव में भी मिल सकता है।

2019 लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी की सरकार में शामिल होने से तत्कालीन जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने इसलिए मना कर दिया था कि मोदी मंत्रिमंडल जेडीयू के एक सांसद को ही मंत्री बनाया जा रहा था। उस वक्त भी आरसीपी सिन्हा का ही नाम मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था और ललन सिंह का पत्ता साफ हो गया था। 2021 में मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में भी आरसीपी सिन्हा और ललन सिंह के साथ संतोष कुशवाहा के मंत्री बनने की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में भी आरसीपी सिन्हा ही मोदी कैबिनेट में शामिल कराया गया और यहां भी राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह का पत्ता साफ हो गया। इसके बाद जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मोदी कैबिनेट में मंत्री आरसीपी सिन्हा पर जेडीयू के अंदर ही सवाल खड़े किए जाने लगे।

ख़बरों अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आरसीपी सिन्हा के इस निर्णय से खुश नहीं थे। नीतीश कुमार के ऊपर यह आरोप लग रहा था कि वह अपनी जाति के व्यक्ति को ही मोदी मंत्रिमंडल में शामिल करा कर लव-कुश समीकरण मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर, नीतीश कुमार अपने ऊपर लगाए जा रहे जाति आधारित राजनीति के धब्बे को साफ कर सकते हैं।

वहीँ बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और पीटीआई के ब्यूरो प्रमुख नचिकेता नारायण का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में जेडीयू मात्र 43 सीट पर ही जीत हासिल कर सकी। जबकि सहयोगी बीजेपी ने 74 सीटों पर जीत हासिल की है। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए गठबंधन के बाद यह पहली बार हुआ है कि नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड, बिहार में बीजेपी की जूनियर पार्टी बन गई है। इसलिए अब नीतीश कुमार संगठन को फिर से मजबूत करने की दिशा में लव-कुश समीकरण को मजबूत करने के साथ अन्य जाति के लोगों को भी अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रहे है। नचिकेता नारायण का मानना है कि इसके लिए नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा को आगे बढ़ाने का काम किया है।

मोदी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हो सके ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर, बिहार और उत्तर प्रदेश के भूमिहार समाज को बड़ा संदेश दे सकते हैं नीतीश कुमार। RJD के एमवाई (MY) समीकरण की तरह JDU पर लगने वाले लव-कुश समीकरण को बढ़ावा देने का आरोप भी, एक झटके में किया जा सकता है खारिज। ललन सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर नीतीश कुमार यह संदेश दे सकते हैं कि उनकी पार्टी जाति आधारित नहीं, बल्कि जेडीयू को सभी जाति का समर्थन प्राप्त है। नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में ललन सिंह को शामिल नहीं दिए जाने से नाराज भूमिहार समाज में भी जाएगा सकारात्मक संदेश।

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